आईसीएसई (इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) बोर्ड की दसवीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा खत्म होने के बाद अब मार्किंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। पहली बार उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन डिजिटल तरीके से की जाएगी। इसके लिए बोर्ड की ओर से शिक्षकों के लिए दिशा निर्देश भी जारी कर दिया गया है।
इस बार काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा परिषद् ने 'लाइव इंक करैक्टर रेकग्नाइजेशन सोल्युशनÓ (एलआईसीआर) तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। बता दें कि अभी तक परीक्षक छात्रों की उत्तर पुस्तिका को चेक करते थे, लेकिन इस तकनीक के आने के बाद छात्रों की उत्तर पुस्तिका का पहले डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।
इसके बाद इसे डिजिटल तरीके से परीक्षक चेक करेंगे। परीक्षकों को सामान्य पेन की बजाय डिजिटल पेन का इस्तेमाल करना होगा। सभी परीक्षकों को उत्तर पुस्तिका चेक करने के लिए एक टैब और उसके साथ में एक एलआईसीआर पेन दिया जाएगा। इस पेन के इस्तेमाल से परीक्षक द्वारा दिए गए अंक खुद टैब में सेव होता जाएगा।
उसमें सही चेक करने का टिक बना होगा। उसे टिक करने से सारे अंक एक साथ आ जाएंगे। बोर्ड का दावा है कि इस तकनीक से केवल दो मिनट में परीक्षक कॉपी चेक कर सकेंगे। जबकि पहले आधा घंटा समय लगता था। इससे परीक्षा परिणाम में जल्दी आएगी। शिक्षकों द्वारा होने वाली गलतियों की संभावनाएं खत्म हो जाएगी।
बच्चों को होने वाली माक्र्स संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा। इस तकनीक से परीक्षा का अंक सीधे वेबसाइट पर चला आएगा। रिजल्ट जारी होने के बाद कोई भी छात्र अपना रोल नंबर डाल कर अपने अंक तुरंत चेक कर सकेगा।
गेर्री आर्थन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सचिव: बच्चों को होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस नई तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। छात्रों को माक्र्स संबंधित होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिल सकेगा।