हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थी अब अंग्रेजों के जमाने से पहने जा रहे रौब्स में नहीं, बल्कि पारंपरिक हिमाचली परिधानों में डिग्री लेंगे। साथ ही हर डिग्री के लिए अलग परिधान होगा। विवि कार्यकारी परिषद में इस नए बदलाव को मंजूरी मिल जाने के बाद आगे की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। ईसी राज्यपाल से इसे मंजूरी मिल जाने के बाद अब विश्वविद्यालय के एक्ट और आर्डिनेंस में शामिल कर कानूनी रूप देने की तैयारी में है।
यह ड्रेस कोड सिर्फ डिग्री लेने वाले छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि समारोह के मुख्यातिथि से लेकर गेस्ट आफ ऑनर, चांसलर, वाइस चांसलर और शिक्षा निदेशक पर भी लागू होगा। यूजी, पीजी, गोल्ड मेडलिस्ट, पीएचडी, मानद उपाधि डी लिट, डिप्लोमा गोल्ड मेडलिस्ट सभी के लिए अलग परिधान डिजाइन किए गए हैं।
दीक्षांत समारोह की डिजाइन की गई पारंपरिक लुक की ड्रेस में पहाड़ी टोपी, लोईया होगा। इसमें टोपी और लोइये की बाजू में और कॉलर में कांगड़ा, चंबा, कुल्लू सहित अन्य जिलों के चर्चित डिजाइन बने ऊनी कपड़े की पट्टी भी होगी। दीक्षांत समारोह की इस ड्रेस का डिजाइन करने के लिए विवि विजुअल आर्ट विभागाध्यक्ष प्रो. हिम चटर्जी, इतिहासकार प्रो. लक्षमण सिंह ठाकुर, म्यूजिक विभाग के प्रो. आरएस शांडिल और वूमेन स्टडी सेंटर की अध्यक्ष प्रो. ममता मोक्टा सदस्य थे।
उन्होंने हर जिले के चर्चित डिजाइन को अलग अलग डिग्री की ड्रेस के लिए तय किया। इसकी बाकायदा विवि में दो बार प्रेजेंटेशन हुई, जिसे मंजूर किए जाने के बाद ही ईसी से अंतिम मंजूरी दी गई थी। दीक्षांत समारोह में मौजूद हर अतिथि, मुख्यातिथि को सफेद, नीले, हरे व अलग रंग में लोईया (गाउन) होगा, जिसमें टोपी और शॉल के डिजाइन की पट्टी लगनी है।
इन तैयार डिजाइन को पारंपरिक हथकरघा में माहिर लोगों के हाथों से तैयार करवाने पर भी सहमति बनी थी। विवि दीक्षांत समारोह के लिए पारंपरिक लुक के करीब 450 परिधान बनवाएगा, जिसे विवि अपने दीक्षांत समारोह में इस्तेमाल करेगा। विवि के वीसी एडीएन वाजपेयी ने कहा कि अगला दीक्षांत समारोह हिमाचली परिधानों में होगा। नया ड्रेस कोड राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया है।