छात्रवृत्ति में घोटाला करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति राशि की निगरानी के लिए राज्य सरकार ने कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी छात्रवृत्ति देने वाले स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की समीक्षा करेगी। कमेटी की ओर से छात्रवृत्ति देने वाले स्कूल, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। कोताही बरतने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
हर साल करोड़ों रुपये विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत प्रदेश के विद्यार्थियों को दिए जा रहे हैं। धनराशि पात्र छात्र को मिल रही है या नहीं। इसकी समीक्षा के लिए कमेटी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों पर नजर रखेगी। हिमाचल में स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों सहित मेधावी छात्रों को विभिन्न योजनाओं के तहत छात्रवृत्ति दी जाती है।
इन योजनाओं पर नजर रखने के लिए कई अफसर भी तैनात हैं, लेकिन इसके बावजूद गड़बड़ी की शिकायतें शिक्षा निदेशालय में पहुंचती हैं। शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने संयुक्त निदेशक डा. एमएस नेगी की अगुवाई में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है।
कमेटी में ऑडिट ब्रांच के सेक्शन आफिसर, डीडीओ (स्कॉलरशिप), जिस क्षेत्र का निरीक्षण करना है वहां के साथ लगते कॉलेज के प्रिंसिपल और स्कॉलरशिप ब्रांच के सहायक को शामिल किया गया है। कमेटी सरकारी पैसे के प्रयोग पर नजर रखेगी। ज्ञात हो कि बीते साल सिरमौर जिला के एक निजी शिक्षण संस्थान प्रबंधन पर संस्थान छोड़ चुके छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति लेने का मामला सामने आया था। इस मामले की अभी भी जांच चल रही है।