गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज छात्रों की शिफ्टिंग के मामले पर अभी भी संशय बना हुआ है। जिससे एमबीबीएस छात्रों में सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय से इस संबध में कोई जानकारी नहीं मिल रही है।
दरसअल, गोल्ड फील्ड इंस्टीट््यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पिछले चार महीने से कक्षाएं नहीं लग रही है। जिसके विरोध में एमबीबीएस छात्र मुख्यमंत्री मनोहरलाल से लेकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तक न्याय की गुहार लगा चुके है। छात्रों ने पिछले दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भी ज्ञापन देकर अपनी समस्या बताई थी।
विद्यार्थियों का आरोप है कि पिछले तीन महीने से आवाज उठा रहे है, लेकिन सरकार को उनके भविष्य की चिंता नहीं है। यहां बता दें, अप्रैल माह में पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विश्विद्यालय रोहतक के कुलपति डा. ओपी कालरा के साथ गोल्ड फील्ड कॉलेज प्रबंधन की मीटिंग हुई थी। जिसमें छात्र हित को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
बैठक कॉलेज प्रबंधन ने अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा है। प्रबंधन का कहना है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने 2014 बैच पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके चलते कॉलेज की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। कॉलेज प्रबंधन ने सरकार के समक्ष फंड उपलब्ध कराने या फिर कॉलेज को ओवरटेक करने की मांग प्रबंधन ने रखी।
कॉलेज के रूख को देख विश्वविद्यालय ने छात्रों को मेवात, खानपुर, अग्रोहा और रोहतक के मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने का प्रस्ताव ने सरकार के पास भेजा था। जिसपर कुलपति कार्यालय ने चुप्पी साध ली है। उधर, प्रशासन के रूख को देख एमबीबीएस छात्रों का रोष बढ़ रहा है।