एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट) के विद्यार्थियों के लिए बहुत बड़ी राहत भरी खबर है। लंबे समय से डिग्री को लेकर चल रहे विवाद पर अब विराम लग सकता है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में आईआईटी और निफ्ट की तर्ज पर एफडीडीआई भी अपनी खुद की डिग्री दे सकेगा।
देशभर में एफडीडीआई के 8 संस्थान हैं। इन संस्थानों में 2012-14 के दौरान एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों की डिग्री को लेकर विवाद चल रहा है। यहां के विद्यार्थियों को डिग्री कौन देगा, इस पर विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में केस दायर कर रखा है।
केस दायर करने वाले छात्र संदीप प्रियदर्शी समेत अन्य विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उनके भविष्य को देखते हुए जल्द ही सुनवाई की जाए। कोर्ट ने वाणिज्य उद्योग मंत्रालय समेत यूजीसी और मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा था।
पिछले दिनों हुई सुनवाई में वाणिज्य उद्योग मंत्रालय ने अपना हलफनामा दायर किया। बकौल, छात्र संदीप प्रियदर्शी मंत्रालय की तरफ से दिए गए हलफनामे में बताया गया है कि एफडीडीआई को आईआईटी और निफ्ट की तर्ज पर दर्जा देने का प्रक्रिया चल रही है।
यदि ऐसा होता है तो एफडीडीआई को स्वायत्त संस्था का दर्जा मिल जाएगा और वह अपनी खुद की डिग्री दे सकता है। हालांकि इस पर अंतिम मुहर संसद की लगेगी, जिसके बाद ही यह दर्जा मिलेगा। गौरतलब है कि आईआईटी और निफ्ट दोनों ही संस्थान अपनी खुद की डिग्री देते हैं।
इन स्थानों पर है एफडीडीआई
रोहतक, नोएडा, छिंदवाड़ा, गूना (मध्यप्रदेश), जोधपुर, चेन्नई, कोलकत्ता और रायबरेली। फिलहाल चार अन्य स्थानों पर भी संस्थान बनाने की तैयारी है।
बोले अधिकारी
इन दोनों संस्थानों की तर्ज पर ही अब एफडीडीआई को दर्जा देने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद डिग्री को लेकर चल रहा विवाद खत्म हो जाएगा। हालांकि अभी इस अंतिम मुहर नहीं लगी है।
- मनोज अग्रवाल, सेंटर इंचार्ज, एफडीडीआई रोहतक