वर्ष 1882 में लाहौर में स्थापित पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के 135 साल के इतिहास में जो कभी नहीं हुआ, वह 2017 में हुआ। स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज हुआ, स्टूडेंट्स ने कैंपस में पथराव किया। वजह थी बढ़ी हुई बेतहाशा फीस के लिए विद्यार्थियों का विरोध। पीयू प्रबंधन वित्तीय संकट की दलील देते हुए फीस बढ़ाने की बात कहता रहा, जबकि छात्रों को यह मंजूर नहीं था। मार्च में बढ़ी फीस वापस लेने की मांग को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
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स्टूडेंट फॉर सोसायटी, एनएसयूआई और एबीवीपी सहित कई छात्र संघों ने भूख हड़ताल शुरू की। करीब एक महीने तक ऐसा ही चलता रहा और आखिर 10 अप्रैल को हजारों छात्र कैंपस से बाहर निकले, गवर्नर हाउस का घेराव करने के लिए, लेकिन उन्हें रास्ते में ही खदेड़ दिया गया। ठीक अगले ही दिन जो हुआ, वह काले अक्षरों में पीयू के इतिहास में दर्ज हो गया। उग्र हुई छात्रों की भीड़ ने कैंपस में पथराव किया। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने छात्रों पर जो लाठियां भांजी, तो फिर आव देखा ना ताव। छात्रों को दौड़ा-दौड़कर पीटा गया।
कक्षाओं से निकालकर मारा। दर्जनों पुलिस कर्मी, छात्र और मीडियाकर्मी घायल हुए, लेकिन बढ़ी हुई फीस का फैसला वापस नहीं लिया गया। बल्कि इसके बाद और ज्यादा फजीहत हुई। क्योंकि चंडीगढ़ पुलिस ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर लिया। हल्ला मचा तो पीयू प्रबंधन ने देशद्रोह जैसी कोई भी शिकायत दिए जाने से इंकार किया। पीयू और पुलिस के बीच हुई इस गफलत से राजनीति गरमा गई। आखिर देशद्रोह का केस हटा और दंगे के लिए करीब 55 छात्रों को गिरफ्तार किया गया। भूख हड़ताल का दौर तभी थमा, जब सभी को छोड़ा गया और फीस बढ़ोतरी का फैसला 27 अप्रैल को वापस लिया गया।
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पीयू की आग ने मचा दिया बवाल
Punjab University VC Arun Grover Press conference
फीस विवाद के बाद पीयू में नया बवाल हो गया क्योंकि 14 मई को पीयू के प्रशासनिक भवन में आग लग गई। लगभग सारा रिकार्ड जल गया। खूब बवाल हुआ।
आरोप लगे कि आग हादसा नहीं साजिश है क्योंकि कुछ प्रमोशन, पेंशन और वित्तीय संकट से जूझ रही पीयू की इंस्पेक्शन का रिकॉर्ड यूजीसी ने मांगा था।सभी तरह के आरोपों का जवाब देने के लिए रिटायर जज की अगुवाई में जांच कमेटी बनी।
आईआईटी की टीम को आग लगने के कारण पता लगाने का जिम्मा दिया गया। दो महीने बाद पूरी रिपोर्ट आई कि आग हादसा ही थी। जले हुए रिकॉर्ड को काफी हद तक पीयू कंप्यूटर सेंटर की मदद से वापस पा लिया गया। जब आईआईटी ने इमारत की रिपेयरिंग करने इस्तेमाल के लायक पाया तो रेनोवेशन शुरू हो सकी।
पीयू में सत्यार्थी आए और मानसिकता बदलने की नसीहत दे गए
कैलाश सत्यार्थी
पीयू में 12 अक्तूबर को नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी आए। बच्चों और बचपन को बचाने के लिए लड़ रहे सत्यार्थी ने पीयू में आकर मानसिकता बदलने की नसीहत दी क्योंकि सत्यार्थी चंडीगढ़ में दस साल की बच्ची के मां बनने की घटना से काफी आहत थे।
उन्होंने पीयू के युवाओं को आग्रह किया कि वे कोई ऐसा काम न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। सत्यार्थी सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत के मकसद से भारत यात्रा पर निकले थे। उन्होंने इस दौरान मूल मंत्र दिया कि बच्चों की करुणा दुनिया को एक कर सकती है।
जबकि उन्होंने अपनी लड़ाई को चुप्पी और मानसिकता के खिलाफ बताया। वे सोच लेकर आए थे कि जब हर बच्चा सुरक्षित होगा, जब मां बेटी के लेट होने पर डरना छोड़ देगी, तब सुरक्षित भारत बनेगा।
वीवीआईपी दाखिलों को लेकर विवाद में रही पीयू
Punjab University VC Arun Grover Press conference
पंजाब यूनिवर्सिटी इस साल वीवीआईपी दाखिलों को लेकर भी विवाद में रही। चंडीगढ़ के डीजीपी तजिंदर सिंह लूथरा को लॉ की डिग्री पूरी कराने के लिए नियम ताक पर रखे गए। मेरठ की यूनिवर्सिटी से डीजीपी लॉ का चौथा सेमेस्टर पास नहीं थे, इसके बावजूद माइग्रेशन कर उन्हें पांचवें सेमेस्टर में दाखिला दे दिया गया।
डीजीपी तेजिंद्र सिंह लूथरा मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री कर रहे थे। उन्होंने 2014 में वहां दाखिला लिया, लेकिन डिग्री पूरी नहीं हो सकी। हालांकि वहां से तीन सेमेस्टर पास कर लिए, लेकिन चौथे में दाखिला लेने के बावजूद पेपर नहीं दे सके। डीजीपी ने पीयू प्रबंधन को भेजे अपने केस में कहा था कि नौकरी और जिम्मेदारियों के चलते पुरानी यूनिवर्सिटी में चौथे सेमेस्टर के पेपर नहीं दे सके। 23 सितंबर की सिंडिकेट बैठक में उन्हें मंजूरी मिल गई। यह अपने आप में पहला मामला था, जब इस तरह से दाखिला मिला हो।
डीजीपी के अलावा पंजाब के मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी भी पीयू से पीएचडी करना चाहते थे, लेकिन एंट्रेंस टेस्ट के एक पेपर में फेल हो गए। इसके बाद पीएचडी के नियमों में बदलाव किया गया और नंबर कम हुए तो चन्नी का पेपर पास हुआ। हालांकि चंडीगढ़ के एसएसपी ट्रैफिक शशांक आनंद ने भी लॉ में दाखिला मांगा, लेकिन वे अपने बॉस के सहपाठी नहीं बन सके।
पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट काउंसिल के 7 सितंबर को चुनाव हुए और दो साल बाद पीयू की सत्ता पर एनएसयूआई का कब्जा हुआ। पीयू की प्रधान, उप प्रधान और सचिव सीट पर एनएसयूआई ने जीत हासिल की जबकि संयुक्त सचिव का पद पुसु गठबंधन ने जीता। दो साल बाद एनएसयूआई ने काउंसिल में जबरदस्त वापसी की और मुख्य विपक्ष एसएफएस को करारी पटखनी दी थी।
पीयू में एमबीए का छात्र जश्न कंबोज प्रधान बना। उप प्रधान का पद भी एनएसयूआई उम्मीदवार करनवीर सिंह ने जीता था। इसके अलावा सचिव पद पर भी एनएसयूआई की वानी सूद जीती। संयुक्त सचिव का पद पुसु गठबंधन के संगठन आईएसए के उम्मीदवार करन रंधावा ने जीता था। पीयू के अलावा कॉलेजों में भी चुनाव हुए और वहां भी एनएसयूआई का बोलबाला रहा।