जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 18 मार्च को अनुपम खेर अभिनीत बुद्धा इन ए ट्रैफिक जाम फिल्म की स्क्रीनिंग विवाद के चलते अब ऐड ब्लॉक पर होगी। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को स्कूल ऑफ आर्ट एंड एस्थेटिक्स में दिखाने के लिए डीन ने वामपंथी छात्र व शिक्षकों के दबाव में आकर मना कर दिया।
हालांकि अब जेएनयू प्रशासन ने फिल्म की स्क्रीनिंग की इजाजत दे दी है। ऐसे में फिल्म दिखाए जाने के दौरान यहां पर छात्र गुटों द्वारा विरोध संभव है। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि 1 घंटा 50 मिनट की फिल्म में कहानी बुद्धिजीवी आतंकवाद का चित्रण देखने को मिलेगा।
अग्निहोत्री के मुताबिक, फिल्म बनाने का विचार तो तीन साल पहले आया था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से देश में जो चल रहा है, उसके चलते फिल्म का रुख कुछ बदला।
फिल्म की शूटिंग हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में की गई है, जो कि विश्व के टॉप 10 में शामिल है। कहानी कुछ-कुछ जेएनयू पर भी आधारित है कि अभिव्यक्ति की आजादी को किस तरह शिक्षक अपने फायदे और राजनीति के लिए छात्रों को मोहरा बना रहे हैं।
anupam kher
- फोटो : अमर उजाला
फिल्म का टाइटल बुद्धा इसलिए रखा क्योंकि बुद्धा एक आइडिया, सोच या विचार है, जोकि अपने आइडिया से दुनिया को अपने काबू में कर सकता है।
नक्सल की एक लड़ाई जंगलों में लड़ी जा रही है तो भारत में इन दिनों बुद्धिजीवी (शिक्षक, साहित्यकार, कलाकार) सड़कों पर विचारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, जो कि बुद्धा हैं और अपने फायदे के लिए विचारों की आजादी के नाम पर एक लड़ाई छेडे हैं।
जोकि देश के लिए बेहद खतरनाक है। देश दो हिस्सों में बंट रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी तो ठीक, लेकिन उस विचारधारा को मनवाने की जिद गलत है। अग्निहोत्री के मुताबिक, अभिनेता अनुपम खेर का किरदार बेहद ही अनोखा होगा, जोकि छात्रों को अनोखे ढंग से मोड़ने की कोशिश करेंगे। फिल्म में माही गिल, पल्लवी जोशी भी शामिल हैं।
बता दें कि फिल्म इंडिया गोल्ड कैटेगरी की है। फिल्म का चयन दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म और पल्लवी जोशी को बेस्ट एक्टर के नाम के लिए हुआ है। मैड्रिड फिल्म महोत्सव, स्पेन और जकार्ता फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा का अवार्ड भी मिला है।