अध्यादेश के बावजूद उत्तराखंड के छात्रों को नीट का ही सहारा
- फोटो : डेमो पिक
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों के लिए कॉमन मेडिकल एंट्रेंस को एक साल के लिए टालने के केंद्र के अध्यादेश का असर प्रदेश में मुश्किल ही दिखेगा। प्रदेश सरकार पहले ही दिल्ली में हुई बैठक में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) पर सहमति दे चुकी है। केंद्र के अध्यादेश के बाद भी राज्य नीट से ही दाखिले कराने की तैयारी में है।
इस साल सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल दाखिलों के लिए पूरे देश में नीट के आयोजन का आदेश जारी किया है। इसके तहत एक मई को हुई एआईपीएमटी को नीट 1 और 24 जुलाई को बाकी अभ्यर्थियों के लिए नीट 2 के आदेश भी जारी किए गए थे। इसके बाद उत्तराखंड प्री मेडिकल प्री डेंटल टेस्ट(यूपीएमटी) पर भी रोक लगा दी गई थी।
इस पर देश के कई राज्यों ने केंद्र सरकार से इसमें अध्यादेश लाकर बदलाव करने की मांग उठाई थी। इस क्रम में 16 मई को दिल्ली में सभी राज्यों की बैठक बुलाई गई। बैठक में उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने नीट का समर्थन किया था। शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी।