फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे डीयू के 22 कॉलेज

Mon, 04 Apr 2016 07:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
दिल्ली यूनिवर्सिटी
विज्ञापन
दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2016-17 के लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू होने वाली है। मगर डीयू के अंतर्गत आने वाले 77 कॉलेजों में से 22 में स्थायी प्रिंसिपल तक नहीं हैं। ये कॉलेज कार्यवाहक प्राचार्यों या फिर स्पेशल ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। इन रिक्त पदों पर भर्तियों के लिए लंबे समय से शिक्षक संगठन मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन


हालांकि डीयू अब इन पर जल्द भर्तियां शुरू करने की बात कह रहा है। बगैर प्रिंसिपल के चल रहे कॉलेजों में डीयू के नामी हिंदू कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, किरोड़ीमल कॉलेज और कमला नेहरू कॉलेज भी शामिल हैं। हिंदू कॉलेज में प्रिंसिपल का पद कई सालों से खाली पड़ा है। कॉलेज एक कार्यवाहक प्रिंसिपल के भरोसे चल रहा है। कॉलेज की वेबसाइट की मानें, तो यहां आखिरी बार स्थायी प्रिंसिपल 2008 में कार्यरत थे। इसके अलावा राजधानी कॉलेज, गार्गी कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स, देशबंधु कॉलेज, भारती कॉलेज, अरविंदो कॉलेज और श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज समेत कई अन्य कॉलेजो में भी अस्थायी प्रिंसिपल ही तैनात हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (डूटा) की मानें, तो प्रिंसिपल के खाली पड़े पद के मुद्दे को डीयू प्रशासन के सामने कई बार उठाया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं डीयू में विभिन्न विषयों व कॉलेजों में शिक्षकों समेत अलग-अलग 4000 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। डीयू के एससी-एसटी फोरम के संयोजक हंसराज सुमन ने बताया कि आरक्षित पदों पर भर्तियों का यही हाल है।
विज्ञापन

 
वहीं, डीयू के प्रवक्ता मलय नीरव का कहना है कि कॉलेजों में प्रिंसिपल की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, लेकिन पूर्व कुलपति दिनेश सिंह के जाने और नए कुलपति के आने के चलते प्रक्रिया रुक गई। साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से एक निर्देश जारी कर कहा गया था कि बीते साल 31 जुलाई के बाद होने वाली नियुक्ति पर रोक लगा दी जाए। पिछले महीने नए कुलपति ने कार्यभार संभाल लिया। अब जल्द से जल्द खाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

ये कहता है डीयू का नियम
दिल्ली विश्वविद्यालय अध्यादेश के मुताबिक, अगर किसी प्रिंसिपल का पद खाली है, तो उस पर अधिकतम छह माह के लिए कार्यवाहक प्रिंसिपल या फिर स्पेशल ऑफिसर ऑन ड्यूटी की तैनाती की जा सकती है। छह माह बाद यदि अवधि बढ़ानी है, तो कुलपति से मंजूरी लेनी पड़ती है। मगर कई कॉलेज इससे अधिक समय से कार्यवाहक प्रिंसिपल के भरोसे चल रहे हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें