सूबे के सबसे पिछड़े जिला मेवात के खंड़ तावडू के लोगों के साथ प्रदेश सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए डेढ़ दशक पहले तावडू में खोला गए मेवात मॉडल स्कूल में लगभग बीस से अधिक गांवों के बच्चों का कोई दाखिला नहीं है।
जिससे तावडू खंड के मेव समुदाय के लोगों में काफी रोष है। सेवानिवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं समाजसेवी डाक्टर सुभान खान ने भी इस तरह के भेदभाव की कडे़ शब्दों में निंदा की है।
काबिलेगौर है की पिछडे जिला मेवात के बाकि खंडों से तावडू को काफी सम्पन्न इलाका माना जाता है। लेकिन इलाके के मेव समुदाय के लोगों के हालत यहां भी काफी दयनीय है।
पिछडेपन की झलक इलाके के लोगों के रहने सहने व शैक्षणिक पिछडेपन को देखकर आसानी से लगाई जा सकती है। हालत इतने खराब है कि इक्कसवी सदी में खंड के अधिकतर गांवों में ना तो अभिभावक ही शिक्षा के प्रति जागरूक है ओर न ही प्रशासन का कोई विशेष ध्यान है।
जिसकी सीधी मार मेवात के भविष्य समझे जाने वाले मेवात के नौनिहालों पर पड रही है और उनका भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है।
इलाके के समाजसेवी हाजी युनुस बेरी, अली प्रधान मंडारका, शहीद सिलखो, इरफान ग्वारका, शेर मौहमद मेवाती, पूर्व पंच जमालुदीन, पूर्व पंच हाशिम छारोड़ा, पंच मकसुद, हनीफ, इकबाल, शेर मौहमद आदि ने बताया कि दो दशक पूर्व मेवात क्षेत्र में सरकार द्वारा विशेष माँडल स्कूल खोले गए थे।
वर्ष 1990 में तावडू में भी मेवात मॉडल स्कूल की शुरूआत की गई थी। ताकि यहां के अल्पसयंक समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। सरकार द्वारा इन स्कूलों में अल्पसयंक छात्राओं को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।
लेकिन स्कूल प्रबंधन की अनदेखी के चलते तावडू स्कूल की बस नूंह रोड़ पर पड़ने वाले करीब 20 गांवों में नहीं पहुंच रही है। जिसके कारण इच्छुक छात्र-छात्राएं मेवात माँडल स्कूल में शिक्षा लेने से वंचित है। जिन ग्रामीणों ने अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया हुआ है।
वह बस की सुविधा नहीं होने के कारण अपनी जान जोखिम में डालकर प्राईवेट वाहनों में आते जाते है। क्षेत्र के जागरूक लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तावडू खण्ड के सभी गांव में नये सत्र में शुरू होने वाले दाखिलों के लिए विशेष दाखिला अभियान चलाकर इलाके के बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर दाखिला दिया जाएं। जिसमें इलाके की बेटियों एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के बच्चों को स्कूल का लाभ मिल सके।
रमजान चौधरी वरिष्ट समाजसेवी एवं अधिवक्ता: हम सरकार व प्रशासन से अपील करते है कि मेवात इलाके में शिक्षा के नाम पर कोई भेदभाव बर्दास्त नहीं किया जाएगा, हमारे बच्चे भी पढ़ कर कामयाबी की ऊंचाई को छूना चाहते है।
शाहीन जिला पार्षद तावडू़-
एक तरफ सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढाओ का नारा लगाती है, वहीं दूसरी ओर मेवात की बेटियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ये इलाके के लोगों के साथ धोखा है जिसको हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
संजय कुमार वर्मा, प्रधानाचार्य मेवात मॉडल स्कूल तावडू: मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है, स्कूल प्रंबनधन से बात कर कर ही कुछ बता पाऊगां।