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चिंता-मनी 40: कर्जदार की मौत के बाद कर्ज कौन चुकाएगा?

Sat, 26 Sep 2020 04:44 AM IST
नारायण कृष्णमूर्ति नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
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Bank Loan - फोटो : pixabay
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले राजीव कुमार के पिता ने बैंक से कर्ज लिया था, पर कोविड-19 के दौरान कर्ज चुकाए बिना ही उनकी मौत हो गई। राजीव की चिंता यह है कि क्या बैंक उन पर कर्ज चुकाने का दबाव डाल सकता है। उनके पिता ने जिस बैंक से कर्ज लिया था, उसने उनकी मृत्यु के बाद भी उनके खाते से ईएमआई की किस्त निकालना जारी रखा। राजीव की मां चिंतित हैं कि वे कर्ज किस तरह चुकाएंगी और इसका उनके बैंक बैलेंस पर तो असर नहीं पड़ेगा। 

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जिम्मेदारी 
हमेशा यह याद रखें कि कर्ज चुकाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सह-कर्जदार या गारंटर की होती है। इनकी गैरमौजूदगी में बैंक या कर्जदाता कर्जदार के कानूनी उत्तराधिकारियों के पास पहुंचते हैं। अगर कानूनी वारिस कर्ज नहीं चुकाते, तो बैंक उनका घर या कार की नीलामी कर कर्ज वसूल लेते हैं। अगर कर्ज पर्सनल लोन के तौर पर या क्रेडिट कार्ड से लिया गया हो, तो बैंक कर्जदार के कानूनी वारिस से कर्ज वसूल करते हैं। बहुत-से लोग क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेते हैं या फिर टीवी तथा इलेक्ट्रॉनिक सामान यह सोचकर उधार में लेते हैं कि उनके न रहने पर कर्ज भी खत्म हो जाएगा। पर यह सच नहीं है। कानूनी वारिस पर अपने माता-पिता का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी आती है। अगर कर्ज मामूली हो, तो कर्ज देने वाले परिवार की आर्थिक स्थिति देख इसे माफ भी कर सकते हैं। पर ऐसा कोई कानून नहीं है।

मृत्यु की सूचना
कर्ज लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके कानूनी वारिसों को कर्जदाता बैंक को इसकी सूचना देनी चाहिए। बैंक वारिसों की सुविधा के अनुसार कुछ महीनों के लिए ईएमआई चुकाने की राहत भी देते हैं। वे कर्जदार का बचा कर्ज उनके वारिसों द्वारा चुकाने की जिम्मेदारी से संबंधित नया दस्तावेज तैयार करते हैं, फिर कर्ज की वसूली करते हैं। खाताधारक की मृत्यु होने पर जिस तरह बैंकों को इसकी जानकारी दी जाती है, उसी प्रकार कर्ज लेने की स्थिति में कर्जदाता बैंक को इसकी जानकारी देने के साथ मृत्यु से संबंधित दस्तावेज मुहैया कराने चाहिए। आम तौर पर वारिस संबंधित बैंकों को इसकी सूचना नहीं देते। बैंक यह जानना चाहते हैं कि कर्ज चुकाया जाएगा या नहीं। आम तौर पर शेषकर्ज कानूनी वारिस या लाभार्थी के नाम स्थानांतरित हो जाता है। अगर किसी संपत्ति से पत्नी को लाभ मिल रहा है, तो बैंक मृत पति का कर्ज उसके नाम स्थानांतरित कर देता है।
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राजीव के लिए समाधान
पिता की मृत्यु के बाद राजीव उनकी संपत्ति को जिस तरह अपने या मां के नाम करते, कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी में भी यही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। जिस तरह भाइयों में पैतृक संपत्ति बंट जाती है, उसी तरह कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी बांट लेनी चाहिए। जैसे, अगर उनका एक और भाई हो, तथा पैतृक संपत्ति मां और दोनों भाई-यानी तीन हिस्सों में बंटी हो, तो कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी तीन हिस्सों में बंटनी चाहिए। इस कर्ज को माफ करने का कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि राजीव के पिता जीवित नहीं हैं। आम तौर पर जब कोई घर खरीदने के लिए बड़ा कर्ज लेता है, तो बैंक उनसे कर्ज के साथ एक जीवन बीमा पॉलिसी लेने के लिए कहते हैं, ताकि मृत्यु की स्थिति में कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी परिवार पर न आ पड़े। राजीव के लिए यह एक सबक है, ताकि भविष्य में जब वह कभी कर्ज लें, तो उसको कवर करने के लिए जीवन बीमा पॉलिसियां लें।

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