वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में भले ही आम नागरिकों के उपयोग के सामानों पर यथासंभव कर से छूट या कम कर लगाने की कोशिश की गई हो लेकिन इसमें वैसे किसानों को घाटा होगा, जो ट्रैक्टर और बैलगाड़ी के सहारे खेती करते हैं।
इसकी वजह ट्रैक्टर, बैलगाड़ी या भैंसा बुग्गी के टायर और ट्यूब के लिए कर की दर 28 फीसदी तय करना है। ऐसी स्थिति से निजात दिलाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और जीएसटी पर राज्य के वित्त मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा को चिट्ठी लिख कर कर की दरें कम करने का अनुरोध किया गया है।
जीएसटी परिषद की बीते दिनों श्रीनगर में हुई 14वीं बैठक में विभिन्न वस्तुओं से लेकर सेवाओं तक के लिए जीएसटी स्लैब की जो सहमति बनी, उसमें सभी किस्म के टायरों और ट्यूब के लिए 28 फीसदी की अधिकतम दर तय की गई है।
चाहे टायर व ट्यूब का उपयोग कार में हो रहा हो, ट्रैक्टर या ट्रैक्टर ट्रॉली में हो रहा हो या बैलगाड़ी-भैंसा बुग्गी में हो रहा हो, जीएसटी में सब के लिए एक ही दर है। हालांकि अभी जो राज्यों में वैट की व्यवस्था चल रही है, उसमें कार के टायर और ट्रैक्टर के टायर पर कर की दरों में अंतर है।
बैलगाड़ी या भैंसा बुग्गी के टायर और ट्यूब पर तो उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा जैसे राज्यों में वैट की दर शून्य है तो कुछ राज्यों में पांच फीसदी तक है।