हम अपने रिफाइनरी का नियमित रूप से मेंटनेंस करते हैं। हर तीन-चार साल में कंप्लीट शटडाउन लेकर उसका टर्न अराउंड भी करते हैं। इस समय हमारे प्लांट में विस्तार का काम चल रहा है। हमने टर्न अराउंड शटडाउन को विस्तार कार्य से जोड़ दिया और एक ही शटडाउन में दोनों कार्य करने की योजना बनाई है। इससे समय बच रहा है और खर्च भी कम हो रहा है। हमारा मानना है कि इससे कंपनी का उत्पादन कम प्रभावित होगा और नुकसान भी कम होगा।
एचपीसीएल ने इंडियन ऑयल के कांडला-गोरखपुर पाइपलाइन में हिस्सेदारी लेने का फैसला किया है। इस पर कितना निवेश होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत इंडियन ऑयल ने 2016 में गुजरात के कांडला से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक 2,757 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का फैसला लिया। यह करीब 9,000 करोड़ रुपये की परियोजना है। इसमें एचपीसीएल और बीपीसीएल ने 25-25 फीसदी हिस्सदेारी लेने का फैसला किया है। शेष 50 फीसदी हिस्सेदारी इंडियन ऑयल के पास ही रहेगी। इस पाइपलाइन के जरिए 60 लाख टन सालाना एलपीजी का परिवहन किया जाएगा। यह देश की सबसे बड़ी एलपीजी पाइपलाइन होगी।
पिछला वित्त वर्ष पेट्रोलियम कंपनियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। एचपीसीएल की क्या स्थिति थी?
वित्त वर्ष 2018-19 पेट्रोलियम कंपनियों के लिए कुल मिलाकर चुनौतीपूर्ण ही रहा। उस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में काफी उचार-चढ़ाव रहा। रुपया और डॉलर के विनिमय दर ने भी खूब आंख मिचौली की। इस कारण एचपीसीएल की ग्रॉस रिफाइनरी मार्जिन (जीआरएम) घटकर 5.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि एक साल पहले यह 7.40 डॉलर प्रति बैरल था। इसके बावजूद कंपनी ने बेहतर काम किया है।
बीते साल कंपनी ने 6,029 करोड़ रुपये का शुद्घ मुनाफा अर्जित किया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 6,357 करोड़ रुपये था। पिछले साल बिक्री बढ़ाने की रणनीति पर काफी काम हुआ। इस वजह से कंपनी की कुल बिक्री 2.95 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि इससे एक साल पहले यह आंकड़ा 2.43 लाख करोड़ रुपये था। उस दौरान कंपनी के मुंबई और विशाखपत्तनम रिफाइनरी में क्षमता उपयोग 117 फीसदी रहा था।
पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाने से काफी नुकसान हो रहा है। इससे कंपनी को पिछले साल 400 करोड़ का नुकसान हुआ।
-मुकेश कुमार सुराणा सीएमडी, एचपीसीएल