देश की नवरत्न कंपनियों में शुमार नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी) ने वित्त वर्ष 2018-19 में अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाया है। खनन क्षेत्र में कठिन हालातों के बावजूद कंपनी ने न सिर्फ लौह अयस्क का खासा उत्पादन किया, बल्कि सोने की एक नई खदान की नीलामी में भी सफलता पाई। कंपनी की भावी रणनीति और चुनौतियों के बारे में अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने एनएमडीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एन. बैजेंद्र कुमार से विस्तृत बातचीत की। पेश है मुख्य अंश :
राष्ट्रीय इस्पात नीति में वर्ष 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। लोहा-इस्पात के उत्पादन के लिए कच्चे माल के तौर पर लौह अयस्क की आपूर्ति में एनएमडीसी की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?
आपने सही कहा कि राष्ट्रीय इस्पात नीति में वर्ष 2030 तक देश में 30 करोड़ टन इस्पात निर्माण की क्षमता का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रमुख कच्चे माल के तौर पर लौह अयस्क का उत्पादन बढ़ाने की चुनौती भी है। देश के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के तौर पर एनएमडीसी पर भी उत्पादन बढ़ाने की जिम्मेदारी है। यह लक्ष्य कैसे प्राप्त हो, इसके लिए हमने भी रणनीति बनाई है।
संक्षेप में बताऊं तो इस समय हम कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। एक ओर जहां नई तकनीक का इस्तेमाल कर मौजूदा खदानों की खनन और आपूर्ति क्षमता बढ़ा रहे हैं। वहीं, स्लरी पाइप लाइन परियोजना के जरिय लौह अयस्क परिवहन के बेहतर साधन विकसित कर रहे हैं। इससे आने वाले समय में हमारा उत्पादन बढ़ेगा, उसकी आपूर्ति बढ़ेगी और इस प्रक्रिया में समय व धन, दोनों की बचत होगी।
एनएमडीसी छत्तीसगढ़ के बस्तर में एकीकृत इस्पात संयंत्र लगाने जा रही है। यह संयंत्र किस तरह से घरेलू इस्पात उद्योग और अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देगा?
हम छत्तीसगढ़ के अपेक्षाकृत पिछड़े इलाके जगदलपुर में 30 लाख टन क्षमता का स्टील प्लांट लगा रहे हैं। नगरनार स्टील प्लांट के नाम से इस कारखाने के शुरू हो जाने के बाद आसपास के क्षेत्र में ढेर सारे सहायक उद्योग भी विकसित होंगे। वहां हम कर्मचारियों और अधिकारियों के रहने के लिए विशाल टाउनशिप विकसित कर रहे हैं, जिसमें हजारों परिवार रहेंगे तो वहां आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी।
हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार मिलेगा। इससे न सिर्फ बस्तर संभाग बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही नई इस्पात नीति के अनुरूप इस्पात उत्पादन भी बढ़ेगा, जिसका सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था को होगा।
कहा जाता है कि आपका नगरनार इस्पात संयंत्र देश के अन्य इस्पात संयंत्रों से अनूठा है। यह किस तरह से अन्य स्टील प्लांट से अलग है?
देखा जाए तो एनएमडीसी खनन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है। इसमें हमने उत्कृष्टता के नए मानक गढ़े हैं। जब हमने एकीकृत इस्पात संयंत्र की स्थापना का निर्णय लिया तभी हमने तय किया कि खनन गतिविधियों की तरह ही हम इस्पात संयंत्र की स्थापना में भी स्टेट ऑफ द आर्ट तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। इसी के अनुरूप हमने काम किया।
हमारे नगरनार प्लांट का ब्लास्ट फर्नेस देश में सबसे बड़े ब्लास्ट फर्नेसेज में से एक है। इसकी जल्द ही कमीशनिंग की जाएगी। एक बार यह शुरू हो जाए, उसके बाद आप देखिएगा कि यह पहले से चल रहे इस्पात संयंत्रों से किस तरह अलग है।
साथ ही वहां कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए विश्व स्तरीय टाउनशिप विकसित करने पर भी जोर है, जिसमें पर्यावरण के अनुरूप मल्टीस्टोरीज आवासीय ब्लॉक बनाए जाने हैं। इसमें सोलर एनर्जी के इस्तेमाल के साथ ही सीवरेज प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं पर जोर रहेगा। सही मायने में वह एक आधुनिक और स्मार्ट सिटी होगा।
लौह अयस्क के अलावा अन्य कौन से खनिज हैं, जिन पर कंपनी फोकस कर रही है?
मध्यप्रदेश के पन्ना में हमारी हीरा खदान है जिसे एशिया की एकमात्र मैकेनाइज्ड माइंस का दर्जा हासिल है। इसके अलावा तंजानिया, आस्ट्रेलिया में हम सोना और मोजाम्बिक में कोयले की खोज (एक्सप्लोरेशन) कर रहे हैं। साथ ही रक्षा क्षेत्र में काम आने वाले स्ट्रेटजिक मिनरल्स की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यह न सिर्फ हमारी रक्षा जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि विदेशी बाजारों में भी हमारी स्थिति मजबूत करेगी।
क्या आप नई खदानों को लीज पर देने या एक्सप्लोरेशन के लिए भी संभावनाएं तलाश रहे हैं?
एनएमडीसी ओडिशा में नई खदानों के लिए प्रयासरत है। इसके लिए हम राज्य सरकार और केंद्रीय इस्पात और खनन मंत्रालय के संपर्क में हैं। इससे पहले हमने ओडिशा के मलंगटोली और मनकंडनाचा में एक्सप्लोरेशन वर्क किया है। हम कई राज्यों में ई-नीलामी में हिस्सा लेकर भी नई माइनिंग लीज लेने की कोशिश कर रहे हैं।
दोणिमलै खदान के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय से पिछले दिनों ही आपके हक में फैसला आया है। अब एनएमडीसी इस मामले में क्या निर्णय लेगी?
माननीय उच्च न्यायालय के फैसले से कार्मिकों के साथ ही कर्नाटक के इस्पात निर्माताओं, कंपनी के निवेशकों, हमारी ग्राहक कंपनियों और स्थानीय लोगों को अत्यधिक खुशी हुई है। यह सब साझा कोशिशों का ही नतीजा है। वहां खनन कार्य शुरू होने का लाभ केंद्र और राज्य दोनों को होगा। साथ ही घरेलू इस्पात उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक गुणवत्तापूर्ण लौह अयस्क की आपूर्ति भी पूरी हो सकेगी।
केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने सभी पीएसयू को एनएमडीसी के सीएसआर मॉडल को अपनाने की सलाह दी है। आपने ऐसा क्या किया कि इसे सभी को अपनाने की सलाह दी जा रही है?
आपके इस सवाल का जवाब देने से पहले मैं आपको एक जानकारी देना चाहूंगा। भारत में कंपनी कानून के तहत कंपनी सीएसआर नियम 2014 के जरिये अनिवार्य किया गया है। हम सीएसआर को अनिवार्य किए जाने से बहुत पहले अपनी स्थापना के समय से ही अपने परियोजना स्थलों और उसके आसपास के क्षेत्र में सीएसआर गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
हमारा यह मानना है कि किसी जगह के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ सबसे पहले उस जगह पर रहने वाले लोगों को मिलना चाहिए। सामाजिक सरोकार एनएमडीसी के डीएनए में निहित है। समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अवसरों और सरोकारों के महत्व को भी हम बखूबी समझते हैं।
एक जिम्मेदार कॉरपोरेट के नाते एनएमडीसी का विश्वास है कि कंपनी के व्यवसाय और समृद्धि के लिए सामाजिक कल्याण अनिवार्य है। यही वजह है कि कंपनी की सीएसआर गतिविधियों का उद्देश्य सदैव स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करना रहा है। इसी को ध्यान में रखकर कंपनी सांविधिक अपेक्षाओं से कहीं अधिक स्थानीय विकास में योगदान देती आ रही है।