सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस योजना में पेमेंट गेटवे को शामिल करना चाहती है। इससे ग्राहक जब भुगतान करेंगे तो कीमतों में आईजीएसटी और सीमा शुल्क भी शामिल हो जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार एक ऐसा प्लटफॉर्म बनाना चाहती है, जिससे पेमेंट गेटवे भी जुड़े हों। इससे ग्राहक जब भी अपने ऑर्डर के लिए टैक्स का भुगतान करेंगे तो एक प्लेटफॉर्म से बारकोड मिलेगा। इसी बार कोड का इस्तेमाल उत्पाद को भारत भेजने में किया जा सकता है।
सरकार अभी तक तय नहीं कर पाई है कि सिर्फ एक मिश्रित टैक्स लगाया जाए या उत्पादों की श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग टैक्स। हालांकि, कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि सभी श्रेणी के उत्पादों पर समान टैक्स लगाने से परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। चीन या दूसरे देशों की ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट से भारतीयों की ओर से खरीदे उत्पाद को लाना अहम है, लेकिन इसके लिए एक समान टैक्स लगाने में कुछ तकनीक समस्याएं आ सकती हैं। साथ ही ध्यान रखना होगा कि टैक्स की प्रस्तावित ऊंची दर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के दिशानिर्देश का उल्लंघन न करती हो।