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पांच रेटिंग एजेंसियों पर बढ़ा जांच का दायरा, आईएलएंडएफएस मामले में आरोपियों पर कसा सेबी का शिकंजा

Mon, 22 Jul 2019 04:43 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंफ्रस्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) समूह में फर्जीवाड़े की पड़ताल कर रहे सेबी ने पांच क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। समूह के नए बोर्ड की ओर से कराए गए फॉरेंसिक ऑडिट में कई गंभीर खामियों का खुलासा हुआ है। इसके बाद सेबी ने अपना शिकंजा और मजबूत कर दिया है।
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) को पता चला है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और आईएलएंडएफएस समूह के पूर्व शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत से 90 हजार करोड़ का भारी-भरकम फर्जीवाड़ा हुआ। फॉरेंसिक ऑडिट में निष्कर्ष निकाला गया कि कमजोर वित्तीय स्थिति के बावजूद समूह की कंपनियों को शीर्ष वित्तीय रेटिंग दी गई। 

सेबी के दखल के बाद दो रेटिंग एजेंसियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को जांच पूरी होने तक जबरन अवकाश पर भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नियामक अब सभी पांचों एजेंसियों में संभावित प्रणालीगत खामियों की जांच कर रहा है। इसके अलावा रेटिंग प्रक्रियाओं में जानबूझकर गड़बड़ी करने वाले कई लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों ने छुपाई जानकारी

ग्रांट थॉर्नटन के विशेष ऑडिट में पता चला है कि समूह के पूर्व उच्च अधिकारियों और रेटिंग एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के बीच ई-मेल से बातचीत होती थी। रेटिंग एजेंसियों के अधिकारियों को समूह की गंभीर नकदी चिंताओं और उसकी कमजोर होती वित्तीय स्थिति की जानकारी थी। इसे छुपाने के लिए समूह के तत्कालीन महत्वपूर्ण अधिकारियों ने रेटिंग एजेंसियों के अधिकारियों को उपहार व अन्य लाभ दिए और जून, 2012 से जून, 2018 तक लगातार ऊंची रेटिंग हासिल की।
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उपहारों के वजन से दब गई फाइल

विशेष ऑडिट में बताया गया है कि छह साल के दौरान कई बार क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने समूह की वित्तीय स्थिति का खुलासा करने और रेटिंग घटाने की कोशिश की। हर बार समूह के अधिकारियों की ओर से उन्हें और बड़े उपहार की पेशकश की जाती, जिसके भार तले दबकर मामले से जुड़ी फाइलें दबी रह जातीं। इन उपहारों में जमीन-मकान से लेकर विदेश यात्रा और लग्जरी गाड़ियां तक शामिल थीं। 

बेहतर रेटिंग से उठाते रहे कर्ज

ग्रांट थॉर्नटन ने ऑडिट में बताया कि समूह की कंपनियों को बेहतर रेटिंग के बलबूते बाजार में साख बनाए रखने और निवेशकों से पैसे लेने व कर्ज उठाने में सहूलियत मिलती रही। जुलाई-अगस्त 2018 में पहली बार समूह की कंपनी आईटीएनएल के कॉमर्शियल पेपर के भुगतान में चूक के बाद रेटिंग घटाई। इस दौरान समूह ने क्रिसिल लिमिटेड, केयर रेटिंग्स, इक्रा, इंडिया रेटिंग्स (फिच समूह) और ब्रिकवर्क जैसी रेटिंग एजेंसियों की मदद ली थी।
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