भारतीय रुपये की गिरती कीमत को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसउल उन्होंने रुपये की गिरती कीमत की वजह को डॉलर का मजबूत होना बताया है। इस साल ग्रीनबैंक के मुकाबले रुपये की कीमत में आठ फीसदी की गिरावट हुई है।
वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक में हिस्सावह लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल तत्व मजबूत हैं और दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में महंगाई कम है।
उनसे जब रुपये के कमजोर होने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, सबसे पहले मैं इसे रुपये की गिरावट के रूप में नहीं देखती हूं, मैं इसे डॉलर की लगातार मजबूती के रूप में देखती हूं, डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, दुनियाभर की अन्य सभी मुद्राएं डॉलर के मुकाबले प्रदर्शन कर रही हैं।
सीतारमण ने कहा, मैं तकनीकी बात नहीं कर रही हूं, लेकिन तथ्य यह है कि भारत का रुपया शायद इस इस डॉलर की मजबूती को झेल चुका है, वहां एक्सचेंज रेट (विनिमय दर) डॉलर की मजबूती के पक्ष में है और मुझे लगता है भारतीय रुपये ने कई अन्य उभरती बाजार मुद्राओं की तुलना में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।
शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 82.35 पर बंद हुआ। शनिवार को 82.68 के एक और रिकॉर्ड निचले स्तर को छू गया, जिसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की संभावना है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ने रुपये के रक्षा के लिए पिछले साल करीब सौ अरब डॉलर खर्च किए होंगे।
7 अक्तूबर तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 532.87 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो एक साल पहले 642.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। भारतीय रिजर्व बैंक और सीतारमण पहले विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के लिए अमेरिकी डॉलर की मजबूती से पैदा होने वाले मूल्यांकन परिवर्तनों को ठहरा चुके हैं।
एनसीपी ने बयान को 'बेतुका' बताया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने वित्त मंत्री के बयान को बेतुका बताया। पार्टी ने कहा कि सीतारमण को अगले चुनावों में भाजपा की जीत के लिए प्रयास करने के बजाय अपने मंत्रालय पर ध्यान देना चाहिए। देश की अर्थव्यवस्था की रक्षा करना वित्त मंत्री के रूप में सीतारमण का सबसे अहम काम है।
कांग्रेस ने मोदी सरकार से पूछा सवाल
कांग्रेस ने वित्त मंत्री की टिप्पणी पर पूछा कि लोग सरकार की अक्षमता और गलत नीतियों की कीमत कब तक चुकाएंगे। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि रुपया अब एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 83 के पार है। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे 100 के पार कराने के बाद ही रुकेंगे।
उन्होंने दावा किया कि रुपये को मजबूत करने के लिए पिछले 10-11 महीनों में 100 अरब डॉलर खर्च किए गए हैं, लेकिन इसमें गिरावट जारी है। विदेशी निवेशकों को भारतीय अर्थव्यवस्था और मोदी सरकार की नीतियों पर भरोसा नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत का 86 प्रतिशत व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो यह भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार और आयात को प्रभावित करता है, लेकिन वित्त मंत्री को इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने एक नई थ्योरी पेश की है कि डॉलर के मजबूत होने से रुपया कमजोर नहीं हो रहा है।