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इस सप्ताह 70 का स्तर पार कर सकता है रुपया, महंगाई बढ़ाएगी एमएसपी बढ़ोतरी

Mon, 09 Jul 2018 09:57 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने के सरकार के फैसले से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर 0.1-0.2 फीसदी तक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही इसकी वजह से महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा। यह बात डीबीएस की एक रिपोर्ट में कही गई।

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वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजकोषीय गणित के लिहाज से यह प्रभाव जीडीपी के 0.1-0.2 फीसदी के बराबर होगा। इसके कारण 2018-19 में वित्तीय घाटे के जोखिम को सीमित करने के लिए उच्च राजस्व सहायता या पूंजीगत खर्च घटाने की जरूरत पैदा हो सकती है।

आम चुनाव से पहले कृषि समस्याओं के निदान के लिए केंद्र सरकार ने चार जुलाई को धान का एमएसपी रिकॉर्ड 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया, जबकि अन्य खरीफ फसलों के लिए एमएसपी को 52 फीसदी तक बढ़ा दिया।
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बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
विशेषज्ञों ने कहा कि इससे महंगाई बढ़ सकती है और बजट 2018-19 में 1.70 लाख करोड़ रुपये के खाद्य सब्सिडी प्रावधान की जगह यह बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है। डीबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक इस कारोबारी साल की शेष अवधि के लिए महंगाई पर करीब 25-30 आधार अंकों का प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य ब्याज दर के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च एमएसपी से महंगाई का दबाव व वित्तीय घाटा बढ़ेगा और इसके कारण आरबीआई एक बार और ब्याज दर बढ़ाने का फैसला कर सकता है। एजेंसी

आय बढ़ने से तेज होगी गांवों से मांग
उद्योग संघ एसोचैम ने कहा कि 14 खरीफ फसलों का एमएसपी बढ़ने से किसानों की आय बढ़ेगी और इसके कारण गांवों में पैदा होने वाली मांग में भारी इजाफा होगा। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने एक बयान में कहा कि किसानों की समस्याएं दूर करने के लिए एमएसपी आदर्श और सटीक समाधान नहीं हो सकता है, लेकिन दीर्घावधि समाधान निकालने में लंबा वक्त लगेगा और किसानों को इतने लंबे समय तक परेशान नहीं होने दिया जा सकता है।

समग्र उपभोक्ताओं में गांवों की करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी है। जब तक उनके पास खरीदने की समुचित शक्ति न हो, भारतीय अर्थव्यवस्था में जरूरत के मुताबिक मांग नहीं पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ने की जो चिंता पैदा हो रही है उसका समाधान अनाज और सब्जी मंडियों में प्रशासनिक तंत्र सुधार कर किया जा सकता है।

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तेल की कीमतों से रुपये पर दबाव

डॉलर में आ रही मजबूती, विदेशी निवेश के प्रवाह की कमी और बढ़ती तेल कीमतों की चिंता से रुपये पर दबाव बना रह सकता है और यह इस सप्ताह प्रति डॉलर 70 के स्तर से भी नीचे गिर सकता है। यह बात बैंक अधिकारियों ने कही। 28 जून को रुपया 69.10 के रिकार्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। बृहस्पतिवार को यह 68.95 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

घट गई है डॉलर की मांग
एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने कहा कि तेल की ऊंची कीमतें और तेल कंपनियों व साधारण आयातकों द्वारा डॉलर की मांग के कारण चालू खाता घाटा बढ़ने की चिंता से रुपया प्रभावित हो रहा है। यह इस सप्ताह 70 के स्तर को छू सकता है, लेकिन वहां बना नहीं रहेगा।

बैंक के एक ट्रेजरर ने कहा कि विदेशी ऋण चुका रही कंपनियां भी डॉलर जमा कर रही हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आरबीआई रुपये को 69.30 से नीचे नहीं गिरने देगा। यदि यह इससे नीचे गिरता है, तो तुरंत ही यह 70 के स्तर को छू लेगा।

इस वजह से बना है दबाव
विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के कारण सभी एशियाई मुद्राओं पर दबाव है, लेकिन रुपये पर सर्वाधिक बुरा असर पड़ा है। एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में भी व्यापार युद्ध के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेश घटा है। 
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