रिपोर्ट में कहा गया है कि दर में इजाफे के बावजूद खुदरा महंगाई के मौलिक संकेतक कमजोर बने हुए हैं। अक्तूबर में उपभोक्ता आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) में बड़ा उछाल इसलिए भी दिखा है, क्योंकि पिछले साल की समान अवधि में काफी कम 2.2 फीसदी रहा था। इसके अलावा पिछले महीने प्याज सहित सब्जियों के दाम में बेतहाशा वृद्धि का भी सीपीआई पर असर हुआ है।
अक्तूबर में गैर खाद्य उत्पादों की और गैर ईंधन क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.3 फीसदी पहुंच गई, जो सितंबर में 3.7 फीसदी थी। हालांकि, राजकोषीय घाटे के 3.3 फीसदी के तय लक्ष्य से 0.50 फीसदी बढ़कर 3.8 फीसदी पहुंचने के अनुमान से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।
2019-20 में 4 फीसदी रह सकती है खुदरा महंगाई : एसबीआई
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी शोध रिपोर्ट में कहा है कि इस साल अगस्त और सितंबर में ज्यादा बारिश होने की वजह से सब्जियों के दाम में उछाल जारी रह सकता है। इससे 2019-20 में खुदरा महंगाई की औसत दर चार फीसदी रह सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में अधिक वर्षा से कई खाद्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे खाद्य उत्पादों की महंगाई दर तो बढ़ेगी, लेकिन कोर सीपीआई तीन फीसदी से नीचे रह सकती है। एसबीआई ने भी कहा है कि रिजर्व बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है।