फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बढ़ती महंगाई के बावजूद 0.50 फीसदी तक रेपो रेट घटा सकता है रिजर्व बैंक

Fri, 15 Nov 2019 04:21 AM IST
गौरव पाण्डेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • ब्रोकरेज कंपनियों ने कहा, विकास को गति देने पर रह सकता है केंद्रीय बैंक का जोर
  • इस वित्त वर्ष में होने वाली अगली दोनों एमपीसी बैठक में बैंक दे सकता है सहूलियत
  • खुदरा महंगाई दर अक्तूबर में बढ़कर 4.62 फीसदी पहुंची, कर्ज की दरें होंगी तर्कसंगत
  • साल 2019-20 में खुदरा महंगाई की औसत दर चार फीसद रह सकती है : एसबीआई
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बढ़ती खुदरा महंगाई के दबाव के बीच रिजर्व बैंक का पूरा जोर विकास दर को रफ्तार देने पर है। आरबीआई इसके लिए चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट में 0.40 फीसदी कटौती और कर सकता है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बोफाएमएल ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि एमपीसी की अगली दोनों बैठक में रेपो रेट में कटौती हो सकती है।

विज्ञापन


अक्तूबर में खुदरा महंगाई दर 4.62 फीसदी पहुंचने के बाद से ही आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) ने अनुमान जताया है कि गिरती अर्थव्यवस्था को थामने के लिए आरबीआई कर्ज की दरों को और तर्कसंगत बनाएगा और फरवरी तक रेपो रेट में कटौती कर चार फीसदी पर ला सकता है। 

रेपो रेट निर्धारित करते समय आरबीआई खुदरा महंगाई आंकड़ों पर ध्यान देता है। दरअसल, जून तिमाही में विकास दर छह साल के निचले स्तर पर लुढ़ककर 5 फीसदी पहुंच गई थी और विश्लेषक अंदाजा लगा रहे हैं कि सितंबर तिमाही में यह 5 फीसदी से भी नीचे जा सकती है। 
विज्ञापन


ऐसे में अर्थव्यवस्था की सुस्ती तोड़ने के लिए आरबीआई दिसंबर में 0.25 फीसदी और फरवरी में 0.15 फीसदी की कटौती रेपो रेट में कर सकता है। कोटक महिंद्रा बैंक ने भी अनुमान जताया है कि विकास दर में सुस्ती के मद्देनजर आरबीआई इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी कटौती कर सकता है।

विज्ञापन

कमजोर हैं महंगाई के संकेतक

रिपोर्ट में कहा गया है कि दर में इजाफे के बावजूद खुदरा महंगाई के मौलिक संकेतक कमजोर बने हुए हैं। अक्तूबर में उपभोक्ता आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) में बड़ा उछाल इसलिए भी दिखा है, क्योंकि पिछले साल की समान अवधि में काफी कम 2.2 फीसदी रहा था। इसके अलावा पिछले महीने प्याज सहित सब्जियों के दाम में बेतहाशा वृद्धि का भी सीपीआई पर असर हुआ है। 

अक्तूबर में गैर खाद्य उत्पादों की और गैर ईंधन क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.3 फीसदी पहुंच गई, जो सितंबर में 3.7 फीसदी थी। हालांकि, राजकोषीय घाटे के 3.3 फीसदी के तय लक्ष्य से 0.50 फीसदी बढ़कर 3.8 फीसदी पहुंचने के अनुमान से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

2019-20 में 4 फीसदी रह सकती है खुदरा महंगाई : एसबीआई

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी शोध रिपोर्ट में कहा है कि इस साल अगस्त और सितंबर में ज्यादा बारिश होने की वजह से सब्जियों के दाम में उछाल जारी रह सकता है। इससे 2019-20 में खुदरा महंगाई की औसत दर चार फीसदी रह सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में अधिक वर्षा से कई खाद्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे खाद्य उत्पादों की महंगाई दर तो बढ़ेगी, लेकिन कोर सीपीआई तीन फीसदी से नीचे रह सकती है। एसबीआई ने भी कहा है कि रिजर्व बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें