अधिकारी के मुताबिक, बीते सात साल में कर्नाटक में प्रत्यक्ष कर की वसूली में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2010-11 में देश के कुल प्रत्यक्ष कर वसूली में कर्नाटक की हिस्सेदारी 8.0 फीसदी हुआ करती थी, जो 2017-18 में बढ़कर 10.1 फीसदी हो गई है। प्रत्यक्ष कर की वसूली में राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, केरल और मध्य प्रदेश की भी हिस्सेदारी बढ़ी है।
राजस्थान में प्रत्यक्ष कर की वसूली की दर 2010-11 की 1.3 फीसदी से बढ़कर 2017-18 में 1.9 फीसदी हो गई है। वहीं, हरियाणा में यह आंकड़ा 2.1 फीसदी से बढ़कर 2.6 फीसदी, गुजरात में 3.8 फीसदी से बढ़कर 4.5 फीसदी, केरल में 1.2 फीसदी से बढ़कर 1.7 फीसदी और मध्यप्रदेश में 1.5 फीसदी से बढ़कर यह दर 1.7 फीसदी हो गई है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष सुशील चंद्रा ने पिछले दिनों संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि चालू वित्त वर्ष में अक्तूबर के तीसरे सप्ताह तक कुल प्रत्यक्ष कर वसूली 4.89 लाख करोड़ रुपये रही है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में वसूल हुई राशि के मुकाबले 15.7 फीसदी ज्यादा है। उनका कहना था कि इस वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर की वसूली का जो लक्ष्य तय किया गया है, वह पूरा होगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान कुल 11.5 लाख करोड़ रुपये इस मद में वसूलने का लक्ष्य रखा है।