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रेलवे बजट या मजाक, करोड़ों की याेजनाओं को मिले सिर्फ एक-एक हजार रुपये, क्या ऐसे होगा विकास

Mon, 10 Feb 2020 04:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर सेंट्रल स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
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पिछले बजटों में स्वीकृत रेलवे की कई योजनाओं को इस बजट में सिर्फ और सिर्फ जिंदा रखने की कोशिश हुई है। कानपुर की करोड़ों की पांच पुरानी योजनाओं को ऊंट के मुंह में जीरा जैसा बजट मिला है। जी हां, इन योजनाओं के हिस्से में केवल एक-एक हजार रुपये ही आए हैं।
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इसके माध्यम से इन योजनाओं का अस्तित्व बनाए रखने भर की खानापूरी हुई है। इससे साफ है कि ये योजनाएं अभी लंबे समय तक लटकी रहेंगी। बजट का टोटा होने से इन योजनाओं के रुकने के आसार हैं। इनमें से कई योजनाओं पर पिछले बजट में मिली धनराशि से काम चल रहा है। लेकिन अब झोली लगभग खाली हो चुकी है। 




 
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कानपुर सेंट्रल स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
इन योजनाओं की झोली में आए एक हजार रुपये
-गोविंदपुरी स्टेशन पर टू लेन के रेलवे ओवरब्रिज के लिए एक हजार रुपये मिले हैं। जबकि इस पुल को बनाने के लिए सात करोड़ 78 लाख रुपये का बजट 2018-19 में स्वीकृत हुआ था।    

- कानपुर में 102 और 76 क्वार्टरों वाली रेलवे कालोनियों के बदलाव के लिए भी इस बार एक-एक हजार रुपये बजट में स्वीकृत किए गए हैं।

-फजलगंज के लोको शेड में ट्रैक्शन मोटर शेड बनाने के लिए भी एक हजार रुपये स्वीकृत हुए हैं। जबकि इस प्रोजेक्ट पर 14 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च होने हैं। अब तक रेलवे इसके लिए छह करोड़ 59 लाख रुपये दे चुका है। लेकिन इस बार अस्तित्व बनाए रखने की खानापूरी हुई है। 
 
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कानपुर सेंट्रल - फोटो : अमर उजाला
- न्यू कोचिंग कॉम्प्लेक्स में 24 कोच वाली ट्रेनों की धुलाई और मरम्मत को वाशिंग लाइन बनाने के लिए भी इस बार महज एक हजार रुपये मिले हैं। इसे 12 करोड़ 44 लाख रुपये में बनना है। पहले के बजट में छह लाख 77 हजार रुपये मिल चुके हैं।

- कंक्रीट की बनी पांच ओवरहेड टंकियों को स्टील टंकी में बदलने के काम के लिए इस बार बजट में एक हजार रुपये की व्यवस्था हुई है। 2018-19 में इस प्रोजेक्ट के लिए छह करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था। लेकिन इसकी लागत बढ़ने से अब तक सात करोड़ 64 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

प्राथमिकता के आधार पर तय योजनाओं के लिए उत्तर मध्य रेलवे जोन को 2500 करोड़ रुपये  मिला है। जिन योजनाओं के लिए बजट कम मिला है, वह अस्तित्व में हैं। इन पर बजट के हिसाब से खर्च किया जाएगा।
अजीत कुमार सिंह, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे
 
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