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रियल इस्टेट सेक्टर आएगा GST के दायरे में, बजट से पहले 80 जरूरी वस्तुओं पर घटेगा टैक्स

Wed, 17 Jan 2018 02:11 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आम बजट के दो हफ्ते पहले ही केंद्र सरकार लोगों को एक बड़ी खुशखबरी देने की तैयारी में है। जीएसटी काउंसिल की गुरुवार को होने वाली बैठक में जहां रियल इस्टेट को लाने की घोषणा हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ 80 से ज्यादा गुड्स एंड सर्विस पर टैक्स कम हो सकता है। 

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रियल इस्टेट पर लगेगा केवल 12 फीसदी टैक्स
सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल रियल इस्टेट को भी जीएसटी के दायरे में लाने की घोषणा कर सकता है। इसके लिए 12 फीसदी टैक्स और स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन को भी इसी में शामिल किया जाएगा। इसको 1 अप्रैल से दायरे में लेने की घोषणा भी काउंसिल कर सकता है। 

सिंगल रिटर्न फॉर्म को किया जाएगा शामिल
इसके साथ ही व्यापारियों को सहूलियत देने के लिए काउंसिल अभी चल रहे तीन रिटर्न फॉर्म को खत्म करके एक सिंगल फॉर्म कर सकती है।  अभी GSTR1, GSTR2 और GSTR3 तीन तरह के फॉर्म कारोबारियों को फाइल करने पड़ते हैं।  अगर तीनों फॉर्म एक हो जाते हैं तो फिर व्यापारियों को 37 की जगह साल में केवल 12 बार रिटर्न फाइल करना होगा। 

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ई-वे बिल लागू करने की तैयारी

gst council
जीएसटी काउंसिल ने देश भर में ई-वे बिल को लागू करने पर अपनी मुहर लगा दी थी। अब पूरे देश में 1 फरवरी, 2018 से ई-वे बिल प्रणाली लागू होगी। जीएसटी काउंसिल की 24वीं बैठक में इस पर फैसला किया गया था। ईवे बिल लागू होने से पहले इसके बारे में सभी पहलूओं पर गौर किया जाएगा। 

वहीं 1 जून से इंटर-स्टेट ट्रांसपोर्ट पर ई-वे बिल लागू होगा। 16 जनवरी से ई-वे बिल सिस्टम का ट्रायल रन शुरू होगा। इसके अलावा जिन राज्यों की ई-वे बिल को लेकर तैयारी पूरी हो गई होगी ऐसे राज्यों में 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू किया जा सकेगा।

क्या है ई-वे बिल
ई-वे बिल के तहत 50,000 रुपये से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा।

यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।
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