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अमेरिकाः रियल एस्टेट बाजार में उछाल बना अर्थव्यवस्था के लिए खतरा

Mon, 12 Jul 2021 02:18 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिका में मकानों की कीमत में इस साल के अंत तक दो फीसदी और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसका असर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पर पड़ेगा।
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प्रॉपर्टी - फोटो : pixabay
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विस्तार
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अमेरिका में मकानों की बढ़ती कीमत और किराये ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इस वजह से देश में मुद्रास्फीति दर तेजी से बढ़ी है। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाओं पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक बीते एक साल में मकानों की कीमत 15 फीसदी बढ़ी है। 2021 में पहले छह महीनों में मकान किराये की दर सामान्य से तीन गुना ज्यादा तेजी से बढ़ी। अमेरिका में मुद्रास्फीति की माप में एक तिहाई हिस्सा आवास पर आने वाले खर्च का होता है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो अमेरिका के केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व का यह आश्वासन बेमतलब हो जाएगा कि मुद्रास्फीति की दर जल्द ही घट जाएगी।

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अमेरिका में मकान के लिए कर्ज मुहैया कराने वाली कंपनी फैनी मे के मुताबिक मकानों की कीमत में इस साल के अंत तक दो फीसदी और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। जानकारों का कहना है कि यह हुआ तो फेडरल रिजर्व जिस ब्याज दर पर कर्ज लेता है, उसमें इजाफा होगा। उसका असर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पर पड़ेगा।

फेडरल रिजर्व और जो बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि हाल में कई वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ी महंगाई के बावजूद हालत जल्द काबू में आ जाएगी। सप्लाई चेन संबंधी रुकावटों के दूर होने के साथ अर्थव्यव्यवस्था अपनी सामान्य वृद्धि दर को दोबारा हासिल कर लेगी। लेकिन प्राइवेट फर्म ओपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री टॉरस्टन ने वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम से कहा- 'किराये के मामले में क्या होता है, वह मुख्य बात है। अर्थव्यवस्था के खुलने के साथ किराये बढ़ते गए, तो हम कुल मिला कर मुद्रास्फीति में और बढ़ोतरी देखेंगे।'
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खबरों के मुताबिक निवेशक अब अमेरिका में दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को लेकर अधिक चिंतित हो गए हैँ। उसकी एक वजह कोरोना वायरस संक्रमण में फिर से दिख रहा बढ़ोतरी का रूझान भी है। लेकिन उनकी चिंता का सबसे बड़ा कारण आवास बाजार का ट्रेंड है। सोशल डिस्टेंसिंग नियमों के कारण दफ्तरों और अधिक बड़े घरों की मांग बढ़ी है। इसका असर मकानों की कीमत और किराये पर पड़ा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मई में मकानों की बिक्री में पिछले साल के मई की तुलना में 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। रियल एस्टेट के कारोबारियों की संस्था- नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियटेर्स के मुताबिक इस दौरान मकानों की कीमत में औसत वृद्धि 24 फीसदी रही। मई के अंत तक अमेरिका में बिक्री योग्य मकानों की संख्या घट कर 12 लाख रह गई। यह एक साल पहले की तुलना में 21 फीसदी कम है।

कुछ अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि महामारी खत्म होने के बाद भी मकानों पर लोगों का खर्च बढ़ता रह सकता है। उससे सरकार के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और पर्सनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर इंडेक्स में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। इन दोनों सूचकांकों का कुल मुद्रास्फीति में बड़ी भूमिका रहती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिका सरकार ने कोरोना राहत के लिए वैसे भी बड़े पैमाने पर कर्ज लिया है। सरकार पर कुल कर्ज जीडीपी की तुलना में 100 फीसदी से भी ज्यादा का हो चुका है। यह बढ़ते आर्थिक संकट का संकेत है, जिसका असर अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाओं पर पड़ना तय है। 

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