उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के पास जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने की दिशा में एक और बाधा दूर हो गई है। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री महेश शर्मा ने बताया कि इस प्रतिस्पर्धा से हरियाणा का रोहतक बाहर हो गया है।
अब प्रतिस्पर्धा सिर्फ जेवर और भिवाड़ी के बीच बची है। हालांकि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जेवर के मुकाबले भिवाड़ी प्रतिस्पर्धा में कहीं नहीं ठहरता, इसलिए जीत जेवर की ही होगी।
क्षेत्रीय हवाई सेवा को बढ़ावा देने वाली नीति की घोषणा के बाद महेश शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में दूसरे हवाई अड्डे की आवश्यकता है और हवाई अड्डा निर्माण के लिए ग्रेटर नोएडा के पास जेवर, हरियाणा के रोहतक और राजस्थान के भिवाड़ी का नाम आया था। इस समय रोहतक इस प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है और अब जेवर और भिवाड़ी के बीच मुकाबला है।
आईजीआई पर लगातार बढ़ रही है भीड़
केंद्रीय उड्डयन राज्य मंत्री महेश्ा कुमार
उनके मुताबिक, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भीड़ लगातार बढ़ रही है और अब तो क्षेत्रीय सेवा की शुरूआत हो रही है। ऐसे में वहां भीड़ और बढे़गी, क्योंकि दिल्ली के आसपास के छोटे शहरों के लिए यहां से विमान सेवा शुरू होगी।
इसलिए दूसरा हवाई अड्डा बनाने के बारे में शीघ्र ही निर्णय लेना पडे़गा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भिवाड़ी के मुकाबले जेवर की उम्मीदवारी बीस ही बैठती है। जेवर के पास नोएडा, ग्रेटर नोएडा जैसे बडे़ औद्योगिक क्षेत्र हैं तो पास में ही आगरा, मथुरा, वृंदावन, फतेहपुर सीकरी जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल हैं। इसलिए जेवर में हवाई अड्डा बनाना भिवाड़ी के मुकाबले बेहतर परिणाम देगा।
उल्लेखनीय है कि जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए डीपीआर बनाने पर केंद्र सरकार ने भी हरी झंडी दे दी है। जेवर में हवाई अड्डे का प्रस्ताव सबसे पहले 2001 में राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने रखा था। उन्होंने इसके लिए व्यापक अध्ययन कराकर केन्द्र सरकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए एक रिपोर्ट भी भेजी थी।