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एनसीआर में और गिरेंगी मकान की कीमतें

Fri, 06 May 2016 04:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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घरों की कीमतों और आएगी गिरावट
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सौरभ झावेरी को (बदला हुआ नाम) को थोड़ी देर के लिए इस बात पर कतई भरोसा नहीं हुआ कि नोएडा एक्सटेंशन स्थित सुपरटेक की इकोसिटी में मात्र 26 लाख रुपये में दो बेड रूम का फ्लैट उन्हें मिल रहा है और वह फ्लैट रेडी टू मूव (शिफ्ट के लायक तैयार) है। झावेरी को 890 वर्गफुट में बने इस फ्लैट का ऑफर सीधे तौर पर सुपरटेक से नहीं है, बल्कि इस परियोजना के आरंभिक दौर में बुक कराने वाले निवेशक से आया है, जो इसे बेचना चाहता हैं।
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नोएडा व नोएडा एक्सटेंशन में प्रॉपर्टी डीलर का काम करने वाले बलवंत त्यागी ने बताया कि ऐसे मकानों की संख्या सैकड़ों में है, जो रेडी टू मूव हैं, लेकिन वहां कोई नहीं रह रहा है क्योंकि जिन लोगों ने इन फ्लैटों को पांच-छह साल पहले बुक कराया था, असल में वे निवेशक थे जो अब घाटे में ही सही, उस मकान को बेचकर निकल जाना चाहते हैं। 

औद्योगिक संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 2.5 लाख मकान इंवेंटरी के तौर पर खाली पड़े हैं जो निर्माणाधीन मकानों का 35 फीसदी है। अकेले नोएडा इलाके में 1.2 लाख मकानों की इंवेंटरी है।
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क्या कहती है एसोचैम की रिपोर्ट

एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आवासीय परियोजनाओं की मांग में पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी तो व्यावसायिक जगह की मांग में 40 फीसदी की गिरावट है। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत के मुताबिक  नोएडा स्थित तीन बेडरूम वाले (टू बीएचके व सिंगल रूम) फ्लैट की कीमतों में 35 फीसदी की गिरावट है।

वहीं गुड़गांव में यह गिरावट 30 फीसदी तो दिल्ली के कुछ प्रमुख इलाकों में यह गिरावट 25 फीसदी की है। प्रॉपर्टी विशेषज्ञों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पांच-छह साल पहले वास्तविक ग्राहकों के बजाय निवेशकों ने काफी अधिक संख्या में फ्लैट की बुकिंग कराई। अब उन फ्लैटों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह से दाम में गिरावट का रुख जारी है।

एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बाद मुंबई में 98,000 तैयार फ्लैट खाली पड़े हैं। बंगलूरू में इस प्रकार के फ्लैटों की संख्या 66,000 तो चेन्नई में इसकी संख्या 60,000 यूनिट हैं। ग्राहकों को इस प्रकार के माहौल का लाभ निश्चित रूप से मिलेगा, लेकिन श्रमिकों को इसका नुकसान होने जा रहा है। रीयल एस्टेट क्षेत्र में श्रमिकों की काफी मांग निकलती है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले इस साल 35 फीसदी कम नई परियोजनाएं शुरू हुई हैं।
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