Supreme Court hearing on Saturday
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर जमीन का मालिक उस जगह पर निर्माण केलिए किसी बिल्डर से करार करता है तो वह उपभोक्ता कहलाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत के उस फैसले को दरकिनार कर दिया है जिसमें ऐसे करार में जमीन के मालिक को उपभोक्ता मानने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में यह देखना होगा कि क्या जमीन के मालिक और बिल्डर के बीच कोई संयुक्त करार तो नहीं है।
अगर जमीन मालिक का निर्माण कार्य पर कोई नियंत्रण नहीं है और वह निर्माण कार्य में हिस्सेदार नहीं है तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम केतहत वह उपभोक्ता है।
इससे पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने बुंगा डेनियल बाबू नाम एक व्यक्ति को यह कहते हुए उपभोक्ता मानने से इनकार कर दिया था कि उसने अपनी जमीन पर बहुमंजिली इमारतों के निर्माण के लिए एक बिल्डर से करार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बाबू इस मामले में पार्टनर नहीं है। उसका निर्माण केकाम पर कोई नियंत्रण नहीं है। निर्माण कार्य पर नियंत्रण बिल्डर का है। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग से पहले राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस आधार पर बाबू को उपभोक्ता मानने से इनकार कर दिया था उसका इरादा फ्लैटों को बिक्री करने का था और चार फ्लैट उसने बेची भी थी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आयोग केइस निर्णय को पूरी तरह से गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य उपभोक्ता आयोग को फिर से इस मामले पर विचार करने केलिए कहा है।