सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया जिसमें जेपी एसोसिएट को नोएडा एक्सप्रेस वे पर बनने वाले एक प्रोजेक्ट में समय पर लोगों को फ्लैट न देने पर खरीदारों को 12 फीसदी ब्याज के साथ रकम अदा करने के लिए कहा गया था।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जेपी एसोसिएट को चार करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख तीन अगस्त मुकर्रर की है। हालांकि शीर्ष अदालत ने आयोग के फैसले के उस हिस्से पर रोक लगा दी है जिसमें जेपी एसोसिएट को ब्याज के तौर पर 25 जुलाई तक चार करोड़ रुपये भुगतान करने के लिए कहा गया था।
जेपी एसोसिएट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 2017 तक वह फ्लैट डिलीवर करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 10 खरीदार अदालत में आए हैं। इन खरीदारों से वह बातचीत करने को तैयार हैं।
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने जेपी एसोसिएशन को आदेश दिया था कि वह 21 जुलाई तक फ्लैट डिलीवर कर दें। ऐसा नहीं करने पर उसे प्रति दिन पांच हजार रुपये के हिसाब से खरीदारों को देना होगा। यह तब तक देना होगा जब तक परियोजना पूरी नहीं हो जाती।
जेपी एसोसिएट ने यह प्रोजेक्ट 2007 में लांच किया था। प्रोजेक्ट को 2011 तक पूरा होना था। इसके तहत 16 टावर बनने थे लेकिन अभी तक यह पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हुआ है। फिलहाल पांच टॉवरों में फ्लैट की डिलीवरी दी जा रही है।