इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बोर्ड ने दिवालिया नियमों में बदलाव कर दिया है, जिससे लाखों होम बायर्स को राहत मिलेगी। बोर्ड द्वारा बनाए गए नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी कंपनी को तभी दिवालिया घोषित किया जा सकेगा, जब वो इस बात का प्लान दे देगी कि उसने सभी स्टेकहोल्डर का ध्यान रखा है।
आम्रपाली, जेपी के बायर्स को मिलेगा फायदा
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, बोर्ड द्वारा नियमों में बदलाव करने से सबसे ज्यादा फायदा उन होम बायर्स को होगा, जिन्होंने जेपी इंफ्राटेक व आम्रपाली जैसी डिफॉल्टर कंपनियों से फ्लैट खरीदा हुआ है। पिछले हफ्ते बोर्ड द्वारा इन नियमों को नोटिफाई किया गया था।
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इससे अब बैंक केवल अपने हित नहीं साध सकेंगे। अभी बैंक केवल अपने हितों को देखते हुए ही कंपनी लॉ बोर्ड में किसी भी लोन डिफॉल्टर कंपनी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। बैंक अक्सर उस कमेटी का हिस्सा होते हैं, जो कंपनी के दिवालिया घोषित करने के लिए बनाई जाती है।
बायर्स के हितों का भी रखना होगा ध्यान
अब बैंकों को ऐसी रियल इस्टेट कंपनियों में फंसे बायर्स के हितों का ध्यान रखना होगा। फिलहाल पिछले साल बनाए गए नियमों के अनुसार किसी भी लोन डिफॉल्टर कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया को 6 महीने में पूरा करना होगा। इसमें केवल तीन महीनों की बढ़ोतरी और हो सकती है। इसके लिए एक इनसॉल्वेंसी रिजॉलूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) को नियुक्त किया जाता है जो कंपनी के ऑपरेशन का चार्ज लेता है और प्लान ऑफ एक्शन भी तैयार करता है।