पहली बार होम लोन लेने जा रहे हैं तो जरा रुकिए ये खबर आपको फायदा दिला सकती है। लोग अकसर लंबे समय की योजना बनाए बिना जल्दबाजी में लोन ले लेते हैं।
बाद में लोन की अदायगी में दिक्कतें सामने आने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है और इस बात का पछतावा होता है कि लोन लेने से पहले उन्होंने इसके लिए अच्छी तरह होमवर्क क्यों नहीं किया। इसलिए घर खरीदने के लिए लोन लेते वक्त सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि इस कर्ज का असर आपके बजट पर काफी लंबे समय तक पड़ता है।
कुछ बिंदुओं पर गौर किया जाए, तो आप खुद को इस तरह की उलझनों और परेशानियों से बचा सकते हैं।
आय का मूल्यांकन कर बचत बढ़ाएं
आप कम-से-कम 3-4 महीने का पूरा हिसाब-किताब रखते हुए अपनी कुछ बुनियादी चीजों पर खर्च की सूची तैयार कर लें। इसके बाद यह देखें कि आप इनमें से किन-किन खर्चों में कटौती कर सकते हैं।
खर्च और बचत के इस आकलन के बाद आपको पता चल जाएगा कि कर्ज भुगतान के लिए कितनी राशि की मासिक किस्त (ईएमआई) चुका सकते हैं। ऐसा घर न खरीदें जो आप पर वित्तीय बोझ बढ़ा दे।
यह सोच कर घर न चुनें कि आपको अगले कुछ वर्षों में प्रोन्नति मिल जाएगी और आय बढ़ जाएगी जिससे आप कर्ज आसानी से चुका देंगे।
डाउन पेमेंट बचाकर रखें
घर खरीदने से पहले आप इतनी राशि जुटा लें जिससे डाउन पेमेंट किया जा सके। आप जितना कम बैंक लोन पर निर्भर रहेंगे, आपको उतना ज्यादा फायदा मिलेगा।
इसके लिए जरूरत पड़ने पर अपनी कोई संपत्ति भी बेच सकते हैं या माता-पिता या अन्य रिश्तेदारों से मदद ले सकते हैं।
जितना कम कर्ज आप बैंक से लेंगे, उसके भुगतान की अवधि और ब्याज राशि भी उतनी ही कम होगी।
खाते में तीन महीनों की ईएमआई रखें
हड़बड़ी में लेने का फैसला हड़बड़ी में आकर न लें। अलग-अलग बैंकों की पेशकश और ब्याज दर की तुलना करते हुए अपना फायदा देखें। इसके बाद सबसे बेहतर विकल्प का चुनाव करें। अच्छे सौदे के लिए हामी भरें।
सुनिश्चित कर लें कि आपके खाते में किस्त चुकाने लायक पर्याप्त राशि बची रहे। डाउन पेमेंट के बाद भी खाते में कम-से-कम तीन महीने की ईएमआई जितनी रकम हमेशा बनाए रखें। कई बार घर खरीदने के बाद अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाता है।
बीमारी, दुर्घटना या ऐसे ही अन्य किसी आपात खर्च के लिए एक फंड बचा के रखना चाहिए। अन्यथा इन खर्चों के चलते आप होम लोन की ईएमआई अदा नहीं कर पाएंगे। इससे आप पर जुर्माना लगने और यहां तक कि संपत्ति की जब्ती तक का खतरा हो सकता है।
अक्सर घर खरीदते वक्त लोगों पर पहले से कुछ कर्जों और वित्तीय दायित्वों का भी बोझ रहता है। मसलन पहले लिया गया ऑटो लोन, पर्सनल या एजुकेशन लोन इत्यादि। ऐसी परिस्थितियों में इन सभी कर्जों को एक साथ जोड़ देना बेहतर होता है।