एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा है कि उनके अनुमान में तैयार खड़े मकानों की कीमत 20 फीसदी तक कम हो सकते हैं। उन्होंने नकद धन की समस्या से निपटने के लिए आवास विकास कंपनियों को तैयार मकानों को जल्द से जल्द बेचने के प्रयास करने का सुझाव दिया।
लॉकडाउन बढ़ाए जाने का किया स्वागत
इसी बीच रियल एस्टेट से जुड़े विभिन्न संगठनों से सरकार से सामाजिक दूरी की शर्तों के साथ निर्माण गतिविधियां शुरू करने की अनुमति मांगी है। साथ ही नकदी की समस्या से निपटने के लिए सरकार से राहत पैकेज देने की भी मांग की। हालांकि संगठनों ने लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाए जाने का स्वागत किया है।
पारेख ने डेवलपरों को सुझाव दिया कि वह बहुत ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में ना रहें, यह दीर्घावधि में उनके कारोबार को प्रभावित करेगा।
पहले से तैयार फ्लैटों के दाम में आएगी कमी
रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि, ‘‘मेरा मानना है कि रियल एस्टेट की कीमतें 20 फीसदी नीचे आनी चाहिए और यह आएंगी। मेरे हिसाब से नारेडको का अनुमान 10 से 15 फीसदी के बीच है। जबकि मेरा मत है कि हमें 20 फीसदी तक कीमतें नीचे आने के लिए तैयार रहना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि पहले से तैयार फ्लैटों के दाम में भी कमी आएगी, लेकिन डेवलपर बाद में दाम बढ़ने के इंतजार में इन्हें बिना बेचे हुए बैठे हैं।
20 अप्रैल के बाद की योजना का इंतजार
इस बीच दिल्ली से रियल एस्टेट क्षेत्र के संगठन क्रेडाई के राष्ट्रीय चेयरमैन जक्षय शाह ने बयान में कहा कि, ‘‘हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक पाबंदी की अवधि बढ़ाने के फैसले के साथ हैं। हमें सरकार के 20 अप्रैल के बाद की योजना का इंतजार है। हमने सरकार से सीमित निर्माण गतिविधियों के लिए अनुमति देने का भी आग्रह किया है। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र को गति देने में मदद मिलेगी।’’ उन्होंने कहा कि आवास क्षेत्र इस समय नकदी की चुनौती का सामना कर रहा है। समय की नजाकत को देखते हुए रिजर्व बैंक को इसके लिए आर्थिक राहत पैकेज जारी करना चाहिए।
मदद के लिए सरकार को उठाने चाहिए कदम
वहीं हाउसिंग डॉट कॉम, मकान डॉट कॉम और प्रॉप टाइगर डॉट कॉम के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव अग्रवाल ने इस संदर्भ में कहा कि, ‘‘कोरोना वायरस के फैलने का जोखिम अभी भी ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में सरकार का सार्वजनिक पाबंदी को बढ़ाना एक सही निर्णय है।’’ महागुन समूह के निदेशक धीरज जैन ने कहा कि वह प्रधानमंत्री के इस फैसले के साथ मजबूती से खड़े हैं। हालांकि सरकार को क्षेत्र की मदद के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए।