कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए जारी ‘लॉकडाउन’ से प्रभावित रियल एस्टेट क्षेत्र में वेतन में कटौती और रोजगार में कमी की आशंका है।
एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है नुकसान
नकदी संकट से जूझ रहे रियल क्षेत्र में बिक्री आय लगभग थम सी गई है। रियल्टी कंपनियों के संगठनों के अनुसार, देशव्यापी बंद से इस क्षेत्र को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान है। हालांकि जमीन के विकास से जुड़ी कंपनियों और सलाहकारों का मानना है कि अगर सरकार उद्योग के साथ-साथ पूरी अर्थव्यवस्था के लिए कोई पैकेज लाती है, तो उससे नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है रियल एस्टेट क्षेत्र
‘कॉन्फेडरेश्न ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (क्रेडाई) के चेयरमैन जे शाह ने कहा कि, ‘‘कृषि के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। यह हर तरह के लोगों को रोजगार देता है। निर्माण और अन्य संबद्ध कर्मचारी रियल्टी क्षेत्र के महत्वपूर्ण हिस्सा है।’’
बिक्री पर प्रभाव स्पष्ट
उन्होंने कहा कि फिलहाल हमारी प्राथमिकता श्रमिकों को मूल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। शाह ने कहा कि, ‘‘वेतन कटौती के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि महामारी कब तक बनी रहती है।’’ नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि, ‘‘बिक्री पर प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे पर दिखेगा। इसलिए पहली प्रतिक्रिया में रूप में वेतन कटौती हो सकती है। कुछ नौकरियां भी जा सकती है।’’
दिवालिया हो सकती हैं कंपनियां
उन्होंने कहा कि कंपनियों की आय पर असर पड़ा है जो पहले से नकदी समस्या से जूझ रहे हैं। इससे कर्ज लौटाने में चूक की स्थिति बन सकती है। हीरानंदानी ने कहा, ‘‘अगर बकाया कर्ज लौटाने में चूक होती है और यह संख्या बढ़ती जाती है, तो कंपनियां दिवालिया हो सकती हैं। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा।’’
सीबीआरई के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका) अंशुमन मैग्जीन ने कहा, ‘कोरोना वायरस की स्थिति अभी भारत में उभर ही रही है और इसके उद्योग के ऊपर प्रभाव के बारे में कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।’