रेरा लागू होने के बाद से पिछले दो वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बिना बिके मकानों की संख्या 26 फीसदी कम हुई है। एनारॉक और नरोडको की संयुक्त रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपी के तीन शहरों नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में पिछले दो साल में बिना बिकी आवासीय इकाइयों की संख्या एक चौथाई तक कम हो गई है। गुरुग्राम में इस दौरान इजाफा हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एक तरफ एनसीआर में शामिल यूपी के तीन शहरों ने बिना बिके मकानों की संख्या घटाने में सफलता पाई, तो दूसरी ओर दिल्ली में इसी दौरान इस तरह इकाइयां 20 फीसदी बढ़कर 12,960 पहुंच गई।
साल की तीसरी तिमाही में देश के प्रमुख नौ शहरों में मकानों की बिक्री 9.5 फीसदी घट गई है। प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर में प्रमुख नौ शहरों में कुल 52,855 मकानों की बिक्री हो सकी। अर्थव्यवस्था में सुस्ती और नकदी संकट की वजह से मांग मेें कमी आई है।
रिपोर्ट में कहा गया कि उपभोक्ताओं में अभी प्रॉपर्टी बाजार को लेकर भरोसा पूरी तरह नहीं लौट सका है। ग्राहक रेडी टू मूव मकानों को खरीदने में दिलचस्पी दिखाने के साथ बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड वाले डेवलपर्स के पास पैसे लगाने को तरजीह दे रहे हैं। तीसरी तिमाही में नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग में भी 24 फीसदी की गिरावट आई, जबकि बिना बिके मकानों की संख्या 6,21,806 से घटकर 6,01,785 पर आ गई है।
भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में कम वित्त पोषण और अनबिके भंडार के कारण लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए सुधारों और उपायों के बाद अब सकारात्मक परिणाम दिखना शुरू हो गया है।
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-प्रवीण जैन, उपाध्यक्ष, नरेडको