जल्द ही उपभोक्ताओं को बिजली के लिए कम कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसकी वजह कोई सरकारी सब्सिडी नहीं, बल्कि बिजली की उत्पादन लागत में कमी है। बिजली, कोयला, नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक एनटीपीसी की कई यूनिटों की बिजली उत्पादन लागत में लगभग 40 पैसे की कमी आई है।
कोयले के उत्पादन में रिकार्ड बढ़ोतरी, कोयले के आयात में होने वाली कमी व प्लांटों के लिए आवंटित कोयले का एक-दूसरे प्लांट के लिए इस्तेमाल की इजाजत से बिजली उत्पादन की लागत में गिरावट संभव हो पाया है। बिजली की दरें हर राज्य में उस राज्य के राज्य विद्युत नियामक आयोग (एसईआरसी) द्वारा तय की जाती है। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा मुख्य रूप से बिजली की खरीद कीमत व उस बिजली की आपूर्ति के बदले उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली राशि को आधार बनाकर बिजली की दरें तय होती हैं।
ऐसे में बिजली की खरीद कीमत में 40 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी का असर निश्चित रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। एनटीपीसी के मुताबिक कुछ माह पहले तक एनटीपीसी की औसत उत्पादन लागत 3.20 रुपये प्रति यूनिट से अधिक थी जो वर्तमान में घटकर 2.90 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। देश के थर्मल पावर में एनटीपीसी की हिस्सेदारी एक चौथाई से भी अधिक है।