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17 महीनों बाद थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी

Tue, 17 May 2016 02:40 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अप्रैल की दरों में 0.34 का इजाफा
  • खुदरा महंगाई दर में भी पिछले माह रही बढ़ोत्तरी
  • अप्रैल में आलू, दाल, चीनी, दूध के दाम बढ़े
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महंगाई दर में वृद्धि
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विस्तार
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पिछले 17 महीनों से नकारात्मक क्षेत्र (-) में रहने के बाद गत अप्रैल महीने की थोक महंगाई दर में 0.34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल मार्च में थोक मुद्रास्फीति की दर -0.85 फीसदी थी। अप्रैल महीने में खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं और खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर इस दौरान 4.23 फीसदी के स्तर पर चली गई, जबकि इस साल मार्च मे यह दर 3.73 फीसदी थी। इस साल अप्रैल में खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी आई है। पिछले हफ्ते जारी खुदरा महंगाई दर 4.83 फीसदी से बढ़कर 5.39 फीसदी हो गई।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गत अप्रैल में आलू और दालें महंगी हुई। आलू के भाव में 35.45 फीसदी तो दाल में पिछले साल अप्रैल के मुकाबले 36.36 फीसदी का इजाफा रहा। खाने-पीने की चीजों में अनाज के दाम में 2.64 फीसदी, सब्जी मे 2.21 फीसदी, दूध में 2.83 फीसदी, अंडा, मांस व मछली में 3.34 फीसदी की बढ़ोतरी रही। वहीं प्याज की कीमतों में इस दौरान 18.18 फीसदी तो फल में 2.38 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

अप्रैल महीने में गैर खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 7.12 फीसदी रही। लेकिन फ्यूल व बिजली की थोक महंगाई दर में इस अवधि में 4.83 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में एलपीजी के दाम में 1.84 फीसदी, पेट्रोल में 4.18 फीसदी तो हाई स्पीड डीजल में 3.94 फीसदी की गिरावट रही।
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महंगाई दर में 0.71 फीसदी का इजाफा रहा

17 महीनों बाद हुई बढ़ोतरी - फोटो : Getty
आंकड़ों के मुताबिक कई महीनों के बाद मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी गई। अप्रैल माह में मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर में 0.71 फीसदी का इजाफा रहा। चीनी के थोक भाव में अप्रैल महीने में 16.07 फीसदी तो खाद्य तेल में 5.61 फीसदी का इजाफा रहा।

एसोचैम के अध्यक्ष सुनील कनोरिया ने कहा है कि सरकार को खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए आपूर्ति पक्ष की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दाल, अनाज, गेहूं जैसे खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ते जा रहे हैं और आने वाले समय में मानसून में देरी की वजह से खुदरा महंगाई दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा के बाद थोक महंगाई में आई बढ़ोतरी को देखते हुए रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है। हालांकि इस बार मानसून अच्छा रहने की उम्मीद है और मानसून अच्छा रहने पर महंगाई नीचे आ सकती है जिसके बाद आरबीआई महंगाई दर घटाने पर विचार कर सकता है।
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