फिच सॉल्युशंस ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी से लगने वाले आर्थिक झटके को सहने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) 1 अप्रैल, 2020 से शुरू हो रहे वित्त वर्ष के दौरान प्रमुख ब्याज दरों में 175 आधार अंकों यानी 1.75 फीसदी तक कटौती कर सकता है। यह आंकड़ा उसके पिछले 40 आधार अंक के अनुमान से खासा ज्यादा है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि चालू वित्त में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 4.9 फीसदी, जबकि 2020-21 में 5.4 फीसदी तक रह सकती है। फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान आरबीआई की प्रमुख नीतिगत दरों में 1.75 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है, जबकि पहले यह अनुमान 0.40 प्रतिशत था। इससे नीतिगत रेपो दरें 3.40 फीसदी और 3 फीसदी हो जाएंगी, जो वर्तमान में 5.15 फीसदी और 4.75 फीसदी हैं।
फिच सॉल्यूशंस के मुताबिक, तेल की कीमतें गिरने से आने वाले महीनों में महंगाई से बहुत हद तक निजात मिल सकती है, साथ ही फरवरी महीने से रबी फसल की पैदावार आने से खाद्य आपूर्ति में सुधार होगा, जिससे खाद्य महंगाई को कम करने में मदद मिलेगी। मार्च में कच्चा तेल 50 डॉलर से घटकर 30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।