ED अदालत से बाहर निकलते राणा कपूर
- फोटो : PTI
विशेष पीएमएलए अदालत ने 200 करोड़ रुपये के ऋण के मामले में यस बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राणा कपूर को जमानत दे दी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि बिना मुकदमे के आगे कैद की अनुमति केवल सीबीआई के इन शब्दों के आधार पर नहीं दी जा सकती है कि जांच लंबित है।
अदालत ने कहा, क्या सीबीआई को बिना किसी प्रगति रिपोर्ट के अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने में सात साल का समय लेने की अनुमति देना और तब तक एक त्वरित सुनवाई के लिए विचाराधीन कैदी के अधिकार को निलंबित करना कानूनी रूप से स्वीकार्य है? विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, यह गंभीर है।
हालांकि, कपूर अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज कुछ अन्य मामलों में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) द्वारा दर्ज एक निर्दिष्ट अपराध के आधार पर कपूर के खिलाफ 200 करोड़ रुपये के छह ऋणों के संबंध में धनशोधन के आरोपों की जांच कर रहा है, जो यस बैंक ने 2011 और 2016 के बीच मेसर्स मैक स्टार मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एचडीआईएल को दिया था।
वकील विजय अग्रवाल और राहुल अग्रवाल के जरिए दायर अपनी जमानत याचिका में कपूर ने दावा किया कि कथित ऋण धोखाधड़ी के लिए सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में उनका नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि इसलिए उनके खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं है।
अदालत ने मैक स्टार मार्केटिंग को दिए गए ऋण में कथित अनियमितताओं की जांच की स्थिति पर सीबीआई से एक रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि, केंद्रीय एजेंसी ने अपने जवाब में केवल इतना कहा कि उनकी जांच अभी भी प्रगति पर है। इस पर विशेष न्यायाधीश ने कहा, 'आवेदक (कपूर) को बिना मुकदमे के दो साल, दो महीने और तीन दिन तक अनुचित तरीके से कैद में रखना वह कीमत थी जो उन्होंने (कपूर ने) केवल आर्थिक अपराधों की कथित गंभीरता, परिमाण और अलग-अलग प्रकृति के कारण चुकाई है।'
और भी पढ़ें....