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इन 11 तरीकों से बढ़ा सकते हैं आप अपनी सैलरी, बचेगा इनकम टैक्स

Wed, 06 Dec 2017 02:26 PM IST
amarujala.com- Written By: अनंत पालीवाल
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कई बार सैलरी अच्छी होने का फायदा उतना नहीं मिल पाता है, जितना मिलना चाहिए। ऐसा इसलिए है कि सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कुछ ऐसे उपाय है जिन्हें अपनाकर आप आसानी से अपनी टेक होम सैलरी बढ़ा सकते हैं। साथ ही इनकम टैक्स भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से तरीकों से आप यह कर सकते हैं।
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बेसिक सैलरी के स्ट्रकचर में करें बदलाव
 सीटीसी को रिस्ट्रकचर करने के लिए बेसिक सैलरी में बदलाव करना होगा। सीटीसी में सैलरी के दो हिस्‍से होते हैं, एक पार्ट ए और दूसरे पार्ट बी। पार्ट ए में बेसिक सैलरी के अलावा HRA और DA सहित कई सारे कंपोनेंट शामिल होते हैं।

वहीं पार्ट टू में अलग अलग अलाउंस शामिल होते हैं। सैलरी के पार्ट ए पर जहां टैक्‍स लगाता है वहीं पार्ट बी पर टैक्‍स से छूट मिलती है। आप टैक्‍स बचाने के लिए पार्ट ए के कई कंपोनेंट्स को पार्ट बी में ट्रांसफर करा सकते हैं।
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एलटीए, मेडीकल और कार एलाउंस को करें सैलरी में शामिल

कई कंपनियां सीटीसी का पार्ट बी भी देती हैं जिसमें एलटीए, मेडीकल इन्श्योरेंस, फूड कूपन और कार एलाउंस शामिल होता है। ये सैलरी का पार्ट होता है और इस पर एक निश्चित अमाउंट तक किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं देना होता है।

अगर आपको ये मिल रहा है तो अच्छी बात है, क्योंकि इससे आपकी नेट सैलरी में इजाफा होता है और दूसरा सैलरी स्ट्रकचर काफी सही हो जाता है। इसमें से कुछ को लेने के लिए आपको ओरिजनल बिल अपने एचआर को देने होंगे जिसके बाद ही इसका लाभ मिलेगा।

ईपीएफ में बढ़ा सकते हैं इन्वेस्टमेंट
नए नियम के अनुसार कोई भी कर्मचारी ईपीएफ के पेंशन फंड में अपना कांट्रिब्यूशन बढ़ा सकता है। ऐसे में जो अमाउंट का ईपीएफ में खुद ही कट रहा है, उसके अलावा यह कांट्रिब्यूशन होगा। इसके लिए आपको अपने एचआर से कहना होगा, कि वह पेंशन फंड आपका कांट्रिब्यूशन बढ़ा दे। वह अमाउंट नॉन टैक्सेबल होगा।

इसका फायदा ये है कि आप पांच साल बाद ईपीएफ से पूरा पैसा निकाल सकते हैं, जबकि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होने के कारण इंतजार करना होगा। आप पांच साल सर्विस के बाद ईपीएफ से जो विदड्राल करेंगे उस पर किसी प्रकार का टैक्स भी नहीं लगेगा।
 
टैक्स छूट के बराबर है सैलरी तो न करें इन्वेस्टमेंट
सैलरी में आपका एक पार्ट इन्वेस्टमेंट का होता है। आमतौर पर लोग टैक्स सेव करने के लिए इन्वेस्टमेंट करते हैं। अगर आपकी सैलरी टैक्स छूट के दायरे में आ रही हैं तो इन्वेस्टमेंट करने की जरूरत नहीं है । ऐसा इसलिए क्योंकि अंत में जाकर के आपको इसका किसी तरह का कोई लाभ मिलने वाला नहीं हैं।

15 हजार सैलरी वाले न करें इन्वेस्टमेंट

अगर आपने किसी तरह का लोन लिया हुआ है और बेसिक सैलरी 15 हजार रुपए से ऊपर है तो ईपीएफ में किसी तरह का इन्वेस्टमेंट करने से बचे। इसके लिए आप अपने एचआर को बोल सकते हैं। फाइनेंश्यिल प्लानर्स के अनुसार लोन का रिपेमेंट करना आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है। इससे एक तो आपका सिबिल स्कोर अच्छा बनता है, दूसरा आगे चलकर लोन मिलने की संभावना अधिक हो जाती है।   

छोटे एलाउंस का भी उठा सकते हैं टैक्स सेविंग
इस फाइनेंशियल ईयर के अंतिम महीने के अंतिम दिनों में टैक्स सेव करने के लिए कुछ ऐसे छोटे ऑप्शन भी हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप टैक्‍स संबंधी छूट का फायदा उठा सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10 के सब सेक्शन 14(i) के मुताबिक, ये ऑप्शन सैलरी स्लिप में पार्ट बी के अंदर अलाउंस हेड में आते हैं। इसके लिए आपको कंपनी को केवल बिल सबमिट करने होते हैं, जिसका फायदा टैक्स सेविंग करने के लिए लिया जा सकता है।
 
यूनिफॉर्म अलाउंस
अगर आपकी कंपनी में काम करते वक्त यूनिफॉर्म पहनना जरूरी है तो इसके लिए कंपनी की तरफ से यूनिफॉर्म खरीदने पर अलाउंस मिलता है। कई बार कंपनियां साल भर में दो से तीन बार दो जोड़ी यूनिफॉर्म खरीदने के लिए कहती है या फिर अपनी तऱफ से यूनिफॉर्म देती हैं। इसको खरीदने में ज्यादा खर्चा नहीं होता हैं, लेकिन ऐसा करके आप दस हजार रुपए तक का फायदा साल भर में ले सकते हैं।  
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हेल्थ क्लब अलाउंस

कई कंपनियां कर्मचारियों के हेल्थ और फिटनेस सही रखने के लिए अपनी तरफ से उपाय करती हैं। अगर आप भी ऐसी किसी कंपनी में काम करते हैं और हेल्थ अलाउंस मिलता है तो आप टैक्स सेव कर सकते हैं। ऐसी कंपनियों के इंप्लाई अपने ऑफर लेटर या सैलरी स्लिप में इसको देख सकते हैं और टैक्स में छूट का लाभ ले सकते हैं।  
 
मोबाइल, इंटरनेट के बिल
अगर आप किसी आईटी कंपनी या फिर ऐसे संस्थान में काम करते हैं, जहां पर फोन और इंटरनेट का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है तो भी आप इनकम टैक्स में छूट पा सकते हैं। अगर कंपनी फोन और इंटरनेट के बिल का पेमेंट करती है तो इसका इस्तेमाल आप टैक्स सेविंग के लिए कर सकते हैं। इसके लिए आपको पूरे साल के बिल पेमेंट की रसीद को संभाल कर रखना होगा और आपके ऑफर लेटर या सैलरी स्लिप में भी इसका उल्लेख होना चाहिए।
 
सोडेक्सो, गिफ्ट वाउचर्स से मिलती है टैक्स छूट
कंपनी की तरफ से हर महीने मिलने वाले सोडेक्सो मील कूपन या फिर इसी तरह के अन्य गिफ्ट कूपन जो सैलरी के हिस्से होते हैं, इनके जरिए भी साल भर में 28 हजार रुपए सेव किए जा सकते हैं। कई कंपनियां आपके सीटीसी में इसको जोड़ती हैं।

महीने भर में आप इस तरह 2,400 रुपए की बचत कर सकते हैं। इससे ज्यादा के कूपन लेने पर आपको टैक्स देना होगा। इन कूपन का यह फायदा है कि इससे ग्रोसरी और रेस्टोरेंट में खाने के बिल का पेमेंट किया जा सकता है।
 
कंपनी से कार लेने पर मिलती है टैक्स छूट
कंपनी की गाड़ी अगर आपको लीज पर मिलती है तो उसके खर्च को मैनटेन करने के लिए अलाउंस मिलता है, जिसका इस्तेमाल आप टैक्स छूट के लिए कर सकते हैं। इस अलाउंस में कार के लिए पेट्रोल या डीजल, उसका रखरखाव और ड्राइवर की सैलरी शामिल होती है। अगर आपके पास कार है और उसके बाद भी कंपनी लीज पर कार लेने का ऑफर कर रही है तो आप इसको लेने के साथ ही टैक्स में भी छूट ले सकते हैं।
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