आईटी मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई के जरिए भुगतान में कई सौ गुना बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2016 में जो आंकड़ा 90,000 पर था, वह गत फरवरी में 19.10 करोड़ प्रति माह पर पहुंच गया। एनपीसीआई लगातार डिजिटल लेनदेन व्यवस्था को सरल बनाकर उसे गति देने पर काम कर रहा है। टोनेटैग के ध्वनि आधारित भुगतान को आईसीआईसीआई बैंक के एप के जरिए ट्रायल पर चलाया गया। प्रयोग करने वालों ने इसे डिजिटल भुगतान के अन्य तरीकों से आसान बताया।
आवाज से भुगतान ज्यादा सुरक्षित
भारतीय भुगतान परिषद के अध्यक्ष नवीन सूर्या का कहना है कि ध्वनि आधारित भुगतान एक बड़ा तकनीकी नवाचार जैसा है, लेकिन अभी भारतीय बाजार में वह साबित नहीं हुआ है। हालांकि यह तरीका अन्य की तुलना में तनाव रहित है।
एनपीसीआई के एक अधिकारी के मुताबिक, आवाज से भुगतान ज्यादा सुरक्षित व्यवस्था है, क्योंकि आवाज की प्रकृति में कोई भी बदलाव होने पर किसी भी सूरत में भुगतान संभव नहीं है, जबकि अन्य में डिवाइस या कार्ड खोने पर जोखिम रहता है। परीक्षण पूरा होने पर सरकार की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की घोषणा की जाएगी।
सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट से होगा लागू
टोनेटैग कंपनी का दावा है कि ध्वनि आधारित भुगतान की व्यवस्था को नए हार्डवेयर के बिना लागू किया जा सकता है। ग्राहक और व्यापारी के बीच यह सबसे सरल तरीका हो सकता है, जो महज एक सॉफ्टवेयर अपडेट करके लागू किया जा सकता है।