यदि कोई व्यक्ति अपने हेल्थ इंश्योरेंस का कवर बढ़ाना चाहता है, तो उसके लिए नई पॉलिसी लेने की बजाय टॉप-अप पॉलिसी लेना अधिक किफायती विकल्प है। इससे पॉलिसी के अंतर्गत मिलने वाले फायदे में कोई कमी नहीं आती है।
टॉप-अप कवर के कई फायदे हैं। जैसे, किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ एड-ऑन पॉलिसी के तौर पर टॉप अप कवर खरीदा जा सकता है। साथ ही नियोक्ता के तरफ से मिले अपर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर को टॉप-अप पॉलिसी के जरिये बढ़ाया जा सकता है। इन पर आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत आयकर में छूट भी मिलती है।
इसके अलावा, टॉप-अप पॉलिसी हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान होने वाले बड़े खर्चों को कवर करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। वहीं, नई पॉलिसी के मुकाबले इनका प्रीमियम 30 फीसदी तक कम होता है। सही मायने में टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस कवर मेडिकल री-इंबर्समेंट कवर है, जिसकी डिडक्टेबल राशि अधिक होती है।
अर्थात, टॉप-अप कवर मेडिकल खर्च की निर्धारित सीमा के बाद काम करता है। जैसेकि, यदि आपकी कंपनी आपको 2 लाख रुपये का हेल्थ कवर उपलब्ध करा रही है तो इसके ऊपर होने वाले मेडिकल खर्च के लिए आप टॉप-अप इंश्योरेंस कवर का सहारा ले सकते हैं।