अधिकारी का कहना है कि आयकर विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतों को दूर करने के लिए सीबीडीटी पहले से ही प्रयासरत है और इसी के तहत पहले भी डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से काफी काम निपटाया जा रहा है। अब जो नया निर्देश जारी किया गया है, उसके तहत वित्त वर्ष 2018-19 में सभी स्क्रूटिनी असेसमेंट का निपटारा ई-प्रोसिडिंग के जरिये ही किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में आयकरदाता को यह भी पता नहीं चलता है कि उनके मामले को कौन या कहां तैनात आयकर अधिकारी देख रहा है। इस प्रणाली में हो सकता है कि दिल्ली के किसी आयकरदाता का असेसमेंट चेन्नई में बैठा कोई अधिकारी कर रहा हो।
पुराने तरीके से इनकी प्रोसिडिंग
सीबीडीटी के मुताबिक, इसमें भी सात मामलों को अपवाद माना गया है, जिनका काम पुराने तरीके से ही होगा। इनमें वैसे करदाता शामिल होंगे जिनका असेसमेंट आयकर कानून की धारा 153(ए), 153(सी), 147 और 144 के तहत हो रहा है, जिनके पास पैन नहीं है, जिन्होंने पेपर मोड में रिटर्न दायर किया है और उनका ई-फाइलिंग अकाउंट नहीं है, उनकी भी प्रोसिडिंग पुराने तरीके से ही होगी।
पर्सनल हियरिंग भी होगी
सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि कुछ परिस्थितियों में आयकरदाताओं की पर्सनल हियरिंग भी हो सकती है। उदाहरणस्वरूप, जिनके बुक ऑफ अकाउंट में परीक्षा की आवश्यकता हो, मामले में गवाह का परीक्षण जरूरी हो या उनके ऊपर धारा 131 लागू करना हो आदि।