कोरोना संकट के कारण पैदा हुए नकदी संकट के बीच बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से कर्ज लेकर अपनी वित्तीय जरूरतें पूरी कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा हालात में कर्ज पर जोखिम बढ़ने की आशंका से बैंक-एनबीएफसी सबको पर्सनल लोन नहीं दे रहे हैं। ऐसे में अगर आपके पास सोना है या किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) है या फिर आपने म्यूचुअल फंड में निवेश किया है तो इनके बदले कर्ज लेना पर्सनल लोन के मुकाबले काफी सस्ता और सुरक्षित रहता है। पर्सनल लोन पर ब्याज दर 9.5 से 21.3 फीसदी है। बैंक बाजार डॉट कॉम से मिली जानकारी के अनुसार, कर्ज की सुरक्षा के लिहाज से संकट के समय एसेट्स (गोल्ड, एफडी, म्यूचुअल फंड) पर लोन काफी सस्ता पड़ता है और यह आसानी से मिल भी जाता है। प्रोसेसिंग फीस भी अन्य लोन के मुकाबले काफी कम देनी पड़ती है। खास बात है कि ऐसे लोन के लिए किसी भी गारंटी की जरूरत नहीं होती है।
गोल्ड लोन : आसानी से मिलेगा पैैसा
दरअसल, गोल्ड लोन की राशि बाजार में सोने की कीमतों पर निर्भर करती है। ऐसे में सोने की आसमान छूती कीमतों से लॉकडाउन के दौरान गोल्ड लोन लेने का चलन बढ़ा है। आमतौर पर सोने की बाजार कीमत के 60-80 फीसदी के बराबर गोल्ड लोन आसानी से मिल जाता है। इसके लिए कागजी दस्तावेज की भी कम जरूरत पड़ती है। ध्यान देने वाली बात है कि अगर लोन नहीं चुका पाए तो बैंक का सोने पर कानूनी अधिकार हो जाता है।
एफडी : आपके पैसे से आपको कर्ज...
गोल्ड लोन : आसानी से मिलेगा पैैसा
दरअसल, गोल्ड लोन की राशि बाजार में सोने की कीमतों पर निर्भर करती है। ऐसे में सोने की आसमान छूती कीमतों से लॉकडाउन के दौरान गोल्ड लोन लेने का चलन बढ़ा है। आमतौर पर सोने की बाजार कीमत के 60-80 फीसदी के बराबर गोल्ड लोन आसानी से मिल जाता है। इसके लिए कागजी दस्तावेज की भी कम जरूरत पड़ती है। ध्यान देने वाली बात है कि अगर लोन नहीं चुका पाए तो बैंक का सोने पर कानूनी अधिकार हो जाता है।
एफडी : आपके पैसे से आपको कर्ज...
म्यूचुअल फंड : सस्ता और बेहतर
आप म्युचुअल फंड इकाइयों के बदले बैंक या एनबीएफसी से लोन ले सकते हैं। यह दूसरे कर्ज से सस्ता है क्योंकि यह एक तरह से ओवरड्राफ्ट पॉलिसी की तरह होता है। इसमें बेकार पड़े एमएफ इन्वेस्टमेंट का भी लाभ मिलता है। कर की भी कोई उलझन नहीं होती और न ही फंड की इकाइयों को गिरवी रखने से मालिकाना हक पर कोई असर पड़ता है। अगर निवेशक के पास फंड डीमैट रूप में हैं, तो यह काम काफी आसान हो जाता है।
पर्सनल लोन : जोखिम की वजह से होता है महंगा..निजी बैंकों की दरें इस प्रकार हैं...
| ब्याज दर | न्यूनतम | अधिकतम |
| स्टेट बैंक ऑफ इंडिया | 10.35% | 14.75% |
| पीएनबी | 9.20% | 12.05% |
| इलाहाबाद बैंक | 9.60% | 14.05% |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | 10.50% | 15.50% |
| बैंक ऑफ इंडिया | 10.75% | 12.75% |
| केनरा बैंक | 11.80% | 13.85% |
| सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया | 10.25% | 10.30% |
| कॉर्पोरेशन बैंक | 9.30% | 13.40% |
| एचडीएफसी बैंक | 10.75% | 21.45% |
| आईसीआईसीआई बैंक | 10.99% | 18.49% |
| एक्सिस बैंक | 12.00% | 24.00% |
| सिटी बैंक | 9.99% | 18.50% |
| एचएसबीसी बैंक | 10.50% | 17.84% |
| इंडसइंड बैंक | 10.99% | 16.00% |
| आरबीएल बैंक | 17.50% | 24.00% |
| यस बैंक | 10.99% से शुरू | - |
जितनी जल्दी हो, जरूर चुकाएं लोन
नकदी संकट में गोल्ड, एफडी और म्यूचुअल फंड इकाइयों पर लोन लेना सस्ता पड़ता है। सिबिल खराब होने और पुरानी क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होने पर भी एसेट्स के एवज में लोन आसानी से मिल जाता है। हालांकि, इस प्रकार के लोन को जितनी जल्दी हो सके, जरूर चुकाएं अन्यथा लॉन्ग टर्म में आपके निवेश लक्ष्य पर असर पड़ सकता है। -नवीन कुकरेजा, सह-संस्थापक एवं सीईओ, पैसाबाजार डॉट कॉम