किसी काम के लिए पैसे की जरूरत होने पर आमतौर पर लोग बैंक का रुख करते हैं। लेकिन यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि अब बैंक से भी सस्ता और उससे भी कम समय में लोन मिलने लगा है। यही नहीं, आपके पास यदि बचत अधिशेष है और आप उससे बेहतर रिटर्न चाहते हैं, तो इसके लिए भी साधन उपलब्ध हैं।
इसके लिए जो नया साधन सामने आया है, ‘वह पीयर टू पीयर लैंडिंग’ (पी2पी लैंडिंग) कहलाता है। इसका कहीं दफ्तर नहीं है और सब काम इंटरनेट पर होता है, इसलिए इस पर सब कुछ किफायत में हो जाता है।
पी2पी लैंडिंग के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लाइसेंस पाने वाली कंपनी फेयरसेंट डॉट कॉम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रजत गांधी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया अब कर्ज लेने वाले और देने वाले, सबके लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में पी2पी लैंडिंग सामने आया है।
यह विदेश में काफी पहले से चलन में है, लेकिन भारत में यह कुछ साल पहले आया है। इस दिशा में फेयरसेंट देश की पहली कंपनी है और अब कई और कंपनियां इस क्षेत्र में काम करने लगी हैं।
मात्र 9.99 फीसदी पर पर्सनल लोन
बैंक की तुलना में पी2पी क्यों बेहतर है, इस सवाल के जवाब में गांधी का कहना है कि बैंकों से व्यक्तिगत जरूरत के लिए लोन लेने में ज्यादा समय लगता है और ब्याज भी 14 से 20 फीसदी तक देना पड़ता है।
यहां लोन जल्दी मिल जाता है और प्रतिस्पर्धा के चलते ब्याज दर भी कम लगता है। अभी तो फेयरसेंट ने बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों के लिए 9.99 फीसदी सालाना ब्याज दर पर पर्सनल लोन देना शुरू किया है।
130 मानकों पर होता है परीक्षण
गांधी कहते हैं कि इस प्लेटफॉर्म पर लोन लेने के लिए जितने व्यक्ति आते हैं, उससे ज्यादा व्यक्ति इस तलाश में रहते हैं कहां निवेश करने पर उन्हें बैंक से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। पी2पी उन्हें आपस में मिलवा देता है और उनकी क्रेडिट हिस्ट्री जानने में मदद करता है।
बेहतर लोन लाने वालों की तलाश प्रक्रिया के बारे में उन्होंने कहा कि फेयरसेंट 130 मानकों पर लोन लेने वालों का परीक्षण करता है। सबसे पहले ग्राहक का सिबिल स्कोर मंगाया जाता है। फिर देखा जाता है कि उसने कब-कब लोन लिया, कहां से लोन लिया, उसकी सर्विसिंग कैसे हो रही है, कितने बार डिफॉल्टर रहा, क्रेडिट कार्ड पेमेंट की हिस्ट्री क्या है आदि।
इसी के आधार पर ब्याज दर भी तय होता है। गांधी कहते हैं बहुत सारे लोग उनके मानक पर खरे नहीं उतरते, इस वजह से उन्हें लोन नहीं मिल पाता। पी टू पी लैंडिंग में 15 लाख रुपये तक लोन लिया जा सकता है, जबकि लोन वापसी की अधिकतम अवधि तीन साल तक की होती है।