ऐसे कई निवेशक हैं जो बाजार की टाइमिंग को देखकर निवेश करते हैं। बाजार नीचे आने पर वे एसआईपी को रोकते हैं। बाजार बढ़ते समय निवेश शुरू करते हैं। यह निवेश के बुनियादी सिद्धांत के बिल्कुल विपरीत है यानी "बाय लो एंड सेल हाई"। इस तरह, वे अपने सभी लाभ एक ही झटके में गंवा देते हैं, जिन्हें उन्होंने अपने पूरे निवेश कालखंड में अर्जित किया था।
आप अपने निवेश कालखंड पर कायम रहकर इस गलती से बच सकते हैं। बाजार की चाल का आकलन करने के बजाय, आपको अपने निवेश कालखंड के साथ मेल खाते फंड्स की कैटेगरी में निवेश करना चाहिए। इस तरह, आप निवेश की गई पूंजी को खोए बिना सही फंड चुन सकते हैं। इसके अलावा एसआईपी बाजार के टाइमिंग के भ्रम से बचने में मदद करता है और निवेश की आपकी कुल लागत को कम करता है।
कई सारे फंड्स के साथ पोर्टफोलियो
यह सुझाव दिया जाता है कि आपको हमेशा अपने म्यूचुअल फंड निवेश में विविधता रखना चाहिए। लेकिन यदि आप अपने पोर्टफोलियो में बहुत सारे फंड्स को शामिल करते हैं तो यह विविधीकरण के सिद्धांत के खिलाफ काम करने लगता है। यह पोर्टफोलियो होल्डिंग्स में नकल की वजह से है।
आपको पता होना चाहिए कि प्रत्येक योजना के फंड मैनेजर फंड के उद्देश्य के अनुसार सिक्योरिटी के एक निश्चित सेट में निवेश करते हैं। ऐसे में संभव है कि आपके पोर्टफोलियो में समान स्टॉक होल्डिंग वाले दो बड़े-कैप इक्विटी फंड शामिल हो। इस तरह के परिदृश्य में विविधीकरण के नाम पर बहुत से बड़े-कैप इक्विटी फंड आपके पास होंगे और वे मिलकर इसके सकारात्मक प्रभाव को कम कर देंगे। इस प्रकार, आप 7 से 9 फंड के लिए अपना निवेश सीमित कर सकते हैं।
हर नई घटना स्टॉक मार्केट्स में भावनात्मक उतार-चढ़ाव लाती है। इसकी वजह से कई निवेशक अपने लक्ष्य को दरकिनार कर लगातार पोर्टफोलियो एडजस्ट करने लगते हैं। इस अवसर पर आप अपने मित्र की खरीदारी और बिक्री की नकल करने का भी लुत्फ उठा सकते हैं।
लेकिन आपको रुककर विचार करने की जरूरत है। हो सकता है कि आपके मित्र के वित्तीय लक्ष्यों का सेट आपसे बिल्कुल भिन्न हो। हो सकता है कि उसकी चाल आपके पोर्टफोलियो के स्वास्थ्य के अनुरूप न हो। इस तरह बाजार में शोर होने पर ऐसी गतिविधि टालनी चाहिए। भावुक होकर फैसले लेने के बजाय, कम्पोजर बनाए रखें और जानकारी लेने के बाद ही कोई फैसला लें।
पिछले प्रदर्शन पर निर्भरता
कई निवेशक पिछले प्रदर्शन पर निर्भर करता है जो किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम की फैक्टशीट पर उपलब्ध होता है। वे इस तथ्य को भूल जाते हैं कि रिटर्न बदलता रहता है। आपको यह समझने की जरूरत है कि म्यूचुअल फंड अंतर्निहित बेंचमार्क से काफी प्रभावित होते हैं।
पिछले प्रदर्शन पर पूरी तरह से निर्भर करने से आप उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी वह फंड वैसा ही रिटर्न देगा। वैसे यह हमेशा सच नहीं होता। फंड का मूल्य हर तिमाही में बदलता है साथ ही फंड रेटिंग भी। फंड्स को चुनने से पहले आपको अन्य गुणात्मक और मात्रात्मक मानकों का संदर्भ भी लेना चाहिए। हमेशा सादा-वेनिला रिटर्न के बजाय जोखिम-समायोजित रिटर्न तलाशें।
अर्चित गुप्ता, संस्थापक और सीईओ, क्लीयरटैक्स