अक्सर अभिवावक सोचते हैं कि जब बच्चा उच्च शिक्षा के लिए जाए तो पैसा कहां से आएगा। वह शिक्षा ऋण की बात को नकारते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में वह शिक्षा ऋण से मिलने वाली कुछ टैक्स छूट के बारे में नहीं जान पाते। आज हम बतायेंगे कि शिक्षा ऋण उनको कैसे टैक्स छूट प्रदान करता है।
बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है कि किसी भी कोर्स के लिए शिक्षा ऋण लेने से पहले बैंक संस्थान की प्रामाणिकता को जांचते हैं और कर्ज के पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर कर्ज की राशि तय करते हैं।
7.5 लाख रुपये से ज्यादा की राशि होने पर बैंक इस लोन के बदले में कॉलेट्रल सिक्योरिटी मांगते हैं और अभिभावक को लोन का सह आवेदक भी बनाते हैं। इस लोन पर कोर्स की अवधि के बाद 6-12 महीने तक मोरेटोरियम दिया जाता है।
इस दौरान वैसे तो कर्ज पुनर्भुगतान से छूट रहती है , लेकिन सामान्य ब्याज लगता है। मोरेटोरियम खत्म होने के बाद ब्याज को मूल कर्ज में जोड़कर ईएमआई तय होती है। अगर मोरेटोरियम अवधि में अभिभावक सामान्य ब्याज का भुगतान करता है तो इस राशि पर उन्हें टैक्स छूट मिल जाएगी।
दो बच्चों के शिक्षा ऋण पर भी लाभ, छूट की कोई सीमा नहीं
एजुकेशन लोन पर ब्याज में कर कटौती का असीमित लाभ मिलता है। टैक्स छूट का दावा उसी वर्ष से शुरू हो जाता है, जिस साल में लोन चुकाना शुरू होता है । अगले 7 साल तक इसका लाभ मिलता है। यानी कुल 8 साल तक आप टैक्स छूट ले सकते हैं।
दो बच्चों की शिक्षा ऋण पर एकसाथ कर छूट मिलती है। यदि दो बच्चों के लिए 10% ब्याज दर पर 25-25 लाख का लोन लिया है, तो कुल 50 लाख रुपये पर सालाना ब्याज 5 लाख रुपये देना होगा। इस पूरी राशि पर टैक्स छूट मिलेगी।
आवेदन में बरतें सावधानी
शिक्षा ऋण पर टैक्स छूट का लाभ सबसे ज्यादा मिलता है। इस धारा के तहत कर्जधारक को ब्याज राशि के रूप में असीमित टैक्स छूट मिल जाती है । हालांकि , लोन लेने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग शुल्क व अन्य लागत को सावधानीपूर्वक देख लेना चाहिए । कर्ज का पुनर्भुगतान भी तय समय में कर दें , तो आपका सिबिल बेहतर हो जाएगा और आगे होम या कार लोन मिलने में आसानी होगी।
-अतुल गर्ग, कर विशेषज्ञ
कोर्स पूरा होने के बाद छात्र को भी टैक्स में राहत
मोरेटोरियम के दौरान अभिभावक को ब्याज भुगतान पर छूट मिलती है, जबकि नौकरी लगने के बाद अगर छात्र कर्ज का पुनर्भुगतान करता है तो तक छूट का लाभ उसे मिलना शुरू हो जाता है। किसी ने 20 लाख का शिक्षा ऋण लिया और कोर्स की अवधि 4 साल है । इसके एक साल बाद कर्ज पुनर्भुगतान शुरू होता है , तो शुरुआती 5 साल तक अभिभावक को टैक्स में राहत मिलेगी। वहीं, नौकरी लगने पर कर्ज की पूरी अवधि के दौरान छात्र को टैक्स में छूट मिलेगी।
आवेदक के लिए काम की जानकारियां
- अभिभावक आयकर रिटर्न के जरिये मोरेटोरियम अवधि में ब्याज भुगतान पर टैक्स छूट ले सकते हैं। आवेदक के पास देश या विदेश के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश की अनुमति का लेटर होना चाहिए।
- आवेदक का 12 वीं पास होना जरूरी है। बैंक एडमिशन लेटर , शुल्क की जानकारी और मार्कशीट मांग सकते हैं।
- भारत में पढ़ाई के लिए 5% और विदेश के लिए 15% तक मार्जिन मनी की जरूरत होती है।
- लोन स्वीकार होने के बाद बैंक सीधे कॉलेज या संस्थान के खाते में फीस का भुगतान करते हैं। इस कर्ज में शुल्क के अलावा रहने, खाने सहित शिक्षा से जुड़े अन्य खर्चे शामिल रहते हैं।