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इस साल है दमदार प्रदर्शन की उम्मीद

Mon, 07 Jan 2013 12:25 PM IST
नीरव पंचमैतिया, फाउंडर सीईओ, एयूएम फाइनेंशियल एडवायजर्स
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घरेलू म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री दो दशक से ज्यादा पुरानी है। इस दौरान इंडस्ट्री पर कई बार संकट गहराया। हालांकि, इंडस्ट्री हर बार और मजबूत होकर मुश्किलों से बाहर निकली। भारत में इस समय करीब 50 म्यूचुअल फंड कंपनियां हैं, जो कि 3,000 से ज्यादा म्यूचुअल फंड स्कीमें चला रही हैं। जहां तक साल 2013 की बात है तो म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का परफार्मेंस दमदार रहने की उम्मीद है। जिन निवेशकों ने म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश कर रखा है या जो निवेश करने की तैयारी में हैं, वे 2013 में अच्छे रिटर्न की उम्मीद बांध सकते हैं।
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साल 2013 इक्विटी ईयर रहने की उम्मीद है। पिछले 7 साल में सोने ने बेहतरीन रिटर्न दिया है, आने वाला वक्त इक्विटी का होगा। ऐसे में अगर रीटेल इनवेस्टर अच्छे इक्विटी डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो यह अच्छा फैसला साबित होगा। सीधे तौर पर शेयरों में निवेश करने में कई तरह के जोखिम होते हैं। इसमें काफी वक्त लगता है। साथ ही स्टॉक्स में निवेश के लिए बाजार की अच्छी समझ की जरूरत होती है।

फिलहाल स्टॉक एक्सचेंजों में 7,000 से ज्यादा स्टॉक लिस्टेड हैं। ऐसे में इन 7,000 लिस्टेड स्टॉक में से 8-10 अच्छे शेयरों का चुनाव करना मुश्किल है। निवेशकों की ये सारी उलझनें म्यूचुअल फंड में निवेश करके खत्म हो जाती हैं। अच्छी म्यूचुअल फंड कंपनियों में डेडिकेटेड फंड मैनेजर्स और उनकी टीम होती है। यह टीम किसी कंपनी के फंडामेंटल, आने वाले समय में उसके परफार्मेंस, बैलेंस शीट और दूसरी अहम चीजों की पड़ताल करने के बाद स्टॉक खरीदती है। किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में दांव लगाने से पहले उसकी रेटिंग्स, परफार्मेंस के बारे में जानना बेहद जरूरी होता है। हालांकि, निवेशकों को किसी भी रेटिंग एजेंसी की रेटिंग पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। एजेंसी व उसकी रेटिंग दोनों को परखना अहम होता है।
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म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो तैयार करने में निवेशक किसी म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट या फाइनेंशियल प्लानर की भी मदद ले सकते हैं या फिर खुद से रिसर्च कर सकते हैं। बशर्ते आपके पास इसके लिए पर्याप्त समय हो। यह बात ध्यान रखें कि रिसर्च हमेशा इनवेस्ट करने से पहले करनी चाहिए, न कि निवेश करने के बाद। इनवेस्टमेंट का यह मूल मंत्र है कि कोई भी निवेश बिना रिसर्च के नहीं किया जाना चाहिए। साल 2013 में रीटेल इनवेस्टर्स को यही सलाह होगी कि वे सेक्टर, थीमेटिक म्यूचुअल फंड से दूर ही रहें। निवेशक इक्विटी डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड में दांव लगाएं, क्योंकि इससे इनवेस्टर गलत सेक्टर में निवेश करने के जोखिम से बच सकते हैं। निवेशक यह पूरी तरह से म्यूचुअल फंड मैनेजर पर छोड़ दें कि किस सेक्टर में इनवेस्ट करना है।

नए साल में इनवेस्ट का फंडा:  सबसे पहले अपना वित्तीय लक्ष्य तय करें। दिमाग में निवेश का मकसद बिलकुल स्पष्ट होना चाहिए। वह बच्चे की पढ़ाई, उसकी शादी, घर खरीदने या फिर अपने रिटायरमेंट किसलिए निवेश कर रहा है, इसका पता होना चाहिए। दूसरी अहम बात यह है कि अपने वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से निवेश की अवधि तय करें कि आप किसने समय तक के लिए निवेश करना चाहते हैं। तीसरी अहम बात यह है कि आपको जिस पैसे कि जरूरत पांच साल से ज्यादा वक्त के लिए न हो, उसी का निवेश इक्विटी डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड में करें, बाकी का पैसा डेट म्यूचुअल फंड या एमआईपी (मंथली इनकम प्लान) में लगाएं।

डेट म्यूचुअल फंड केवल छोटी अवधि के लिए बेहतर होते हैं। अगर आप कुछ महीने या साल के लिए निवेश करना चाहते हैं तो इनमें इनवेस्ट कर सकते हैं। एक टिपिकल डेट म्यूचुअल फंड, बैंक एफडी से कहीं बेहतर होता है। वहीं, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ्री होता है, अगर एक साल की अवधि के बाद इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचते हैं तो आपको एक भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा, भले ही आपने कितना भी रिटर्न क्यों न कमाया हो। चौथी अहम बात यह है कि रिसर्च पर पर्याप्त वक्त दें। वैल्यूरिसर्चऑनलाइनडॉटकॉम, म्यूचुअलफंड्सइंडियाडॉटकॉम या एएएफआईइंडियाडॉटकॉम जैसी वेबसाइट्स पर जानकारियों की भरमार है। आप जानकारी हासिल करने के लिए ब्लॉग्स की भी मदद ले सकते हैं।
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