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कमोडिटी में निवेश कर चमकाएं अपना पोर्टफोलियो

Mon, 07 Jan 2013 12:24 PM IST
डॉ. नीलांजन घोष, सीनियर वीपी व हेड रिसर्च-स्ट्रेटजी, एमसीएक्स इंडिया लि.
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घरेलू शेयर बाजार में पिछले करीब दो-तीन साल से जारी उठा-पटक और अनिश्चतता के माहौल ने बहुत से इक्विटी निवेशकों को दूसरे विकल्पों के बारे में सोचने को मजबूर किया है। दूसरी ओर सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों के चलते काफी तादाद में छोटे निवेशक बुलियन में निवेश से छिटक गए हैं।
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इन दोनों ही बाजारों से किनारा करने वाले निवेशकों की दिलचस्पी हाल के दिनों में कमोडिटी में बढ़ी है। ऐसे में अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिम को बैलेंस करने के लिए कमोडिटी में पैसे लगाने का चलन बढ़ता दिख रहा है। कमोडिटी निवेश में निवेशकों की रुचि बढ़ने की एक अहम वजह यह भी है कि कमोडिटी बाजार काफी हद तक आर्थिक हालात के अनुरूप ही प्रतिक्रिया देता है। यह खूबी न केवल आम निवेशक के लिए कमोडिटी बाजार की चाल को समझना आसान बनाती है, बल्कि पोर्टफोलियो का जोखिम घटाने में भी मदद करती है।

इसके अलावा कमोडिटी में निवेश बढ़ती महंगाई के खिलाफ निवेशक को ढाल भी मुहैया कराता है क्योंकि महंगाई दर बढ़ने पर कमोडिटी की कीमतों में इजाफा होता है। ऐसे में निवेश पर महंगाई के असर को कम करने के लिए कमोडिटी में आपका निवेश होना बहुत जरूरी है।  2012 में देर से आने के बावजूद मानसून औसत के आसपास रहा। ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि 2013 में भी कमोडिटी में निवेश पर लाभ की बेहतर संभावनाएं हैं।
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कमोडिटी में भी हैं कई विकल्प
कमोडिटी में सीधे निवेश से हिचकने वालों के लिए इससे जुड़े कुछ और भी विकल्प हैं। ई-कमोडिटी ऐसा ही एक इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट है, जो डीमैट फॉर्म में अपना निवेश रखने की सुविधा देता है। इसके अलावा कमोडिटी ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) भी एक सुविधाजन विकल्प है। इसे सिक्योरिटीज के तौर पर माना जाता है। निवेशक इस पर कर लाभ भी ले सकते हैं।

बरतें यह सावधानियां
:- कमोडिटी में निवेश शुरू करने से पहले बाजार के अध्ययन करना जरूरी है।
:- सिर्फ कीमतों में तेजी देखकर निवेश न करें, आगे बाजार अस्थिर भी हो सकता है।
:- कमोडिटी के उत्पादन, आयात-निर्यात और खपत वगैरह की जानकारी रखें।
:- घरेलू बाजार के साथ कमोडिटी के ग्लोबल उत्पादन और मांग पर भी नजर रखें।
:- कमोडिटी में निवेश के लिए जरूरी है जोखिम सहन करने की ताकत का होना।
:- बहुत सीमित मार्जिन के साथ अधिक मात्रा में कभी न करें कारोबार।

घरेलू बाजार में कम जोखिम
बीते वर्ष में ग्लोबल आर्थिक हालात में अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में अस्थिरता रही, जिससे घरेलू कमोडिटी बाजार भी अछूता नहीं रहा। विश्लेषकों का कहना है कि इस साल भी कुछ घरेलू कमोडिटी बाजार में ऐसा ही ट्रेंड रह सकता है। हालांकि मानसून के सामान्य रहने से घरेलू कमोडिटी बाजार में जोखिम कुछ कम रहने का अनुमान है। निवेशकों को 2013 में निवेश की रणनीति बनाने के लिए गुजरे वर्ष में कमोडिटी के प्रदर्शन के बारे में जान लेना हमेशा उपयोगी रहता है।

बीते साल कंपोजिट कमोडिटी इंडेक्स, एमसीएक्स कॉमडेक्स ने 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की। एमसीएक्स के एग्री इंडेक्स में 26.1 फीसदी की गिरावट रही। एनर्जी इंडेक्स 2.8 फीसदी नीचे रहा, जबकि एमसीएक्स मेटल इंडेक्स 11.4 फीसदी की बढ़त में रहा। एग्री कमोडिटी की बात करें, तो धनिया, चीनी, गेहूं, मेंथा ऑयल में बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर सोया रिफाइंड ऑयल, पॉम ऑयल, रबर और कच्चे तेल में गिरावट देखने को मिली।

गोल्ड कमोडिटी में घरेलू बाजार में 13 फीसदी की बढ़त रही। इसके पीछे डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद और घरेलू स्तर पर खुदरा निवेशकों की सोने में रुचि बढ़ने जैसे कारण रहे।
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