स्टैंडर्ड डिडक्शन का मतलब उस कटौती से है, जो आपकी इनकम के अनुसार आपके खर्च और निवेश पर व्यक्तिगत तौर पर लगती है। इसका फायदा यह है कि आपको किसी निवेश या खर्च का बिल पेश नहीं करना पड़ेगा और आपको टैक्स में छूट मिल सकेगी।
इस बात को और आसानी से समझना हो तो इसे ऐसे समझ सकते हैं। कि आपकी सैलेरी से आपकी कंपनी, आपकी पोजीशन के हिसाब से एक निश्चित राशि काट लेती है। जिसके बाद आपकी कर योग्य सैलरी कम हो जाती है। ऐसे में टैक्स लगने वाली राशि कम हो जाती है। इसका क्लेम सैलेरी और पेंशन पाने वाला दोनों कर सकता है।
सेस का झटका
व्यक्तिगत एवं कॉरपोरेट टैक्स पर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेस को 3 से बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया गया है। जबकि 50 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर 10 फीसदी और एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आय पर 15 फीसदी का सरचार्ज जारी रहेगा।