म्यूचुअल फंड इकाइयों की बिक्री पर स्टांप शुल्क नहीं वसूला जाएगा। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के अनुसार, नया नियम एक तरह से इंट्री लोड की तरह होगा। सेबी ने इस नियम को 2009 में ही खत्म कर दिया था, ताकि म्यूचुअल फंड निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। अगर स्टांप शुल्क के रूप में दोबारा यह भार लादा जाता है, तो इसका सीधा असर निवेशकों पर होगा।
स्टांप शुल्क का सबसे ज्यादा असर डेट फंड पर होगा, जो आमतौर पर छोटी अवधि के होते हैं। ऐसे निवेशक जो 30 दिन या उससे कम समय के लिए पैसे लगाते हैं, उनके रिटर्न पर इसका बड़ा असर दिखाई देगा। एक सप्ताह या कुछ दिन के लिए निवेश किए जाने वाले लिक्विड फंडों पर अगर अभी तक 3.5 फीसदी का रिटर्न मिलता है, तो यह घटकर 3.24 फीसदी हो जाएगा।
इसी तरह, 30 दिन के फंड पर रिटर्न घटकर 3.44 फीसदी और 90 दिन की अवधि पर 3.48 फीसदी हो जाएगा। सबसे ज्यादा असर ओवरनाइट फंड पर होगा, जो शुल्क लगने से पहले 2.70 फीसदी रिटर्न देते हैं, जबकि शुल्क लागू होने के बाद यह 0.87 फीसदी घट जाएगा।
इसी फंड के 7 दिन की अवधि में रिटर्न 2.70 फीसदी से 2.44 फीसदी हो जाएगा। 25 जून तक लिक्विड फंड में 5.07 लाख करोड़ रुपये निवेश हो चुका है, जबकि ओवरनाइट फंड में 86,664 करोड़ रुपये निवेशकों ने लगाए हैं।