शोध रिपोर्ट के मुताबिक, हम रेपो रेट में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी की बात खारिज करते हैं, क्योंकि इससे बाजार में अफरातफरी मच सकती है। हालांकि तटस्थ रुख में बदलाव की भी संभावना बनती है, क्योंकि लगातार तीन बार दर में बढ़ोतरी के साथ तटस्थ रुख आरबीआई के संदेश को परस्पर विरोधी बना सकता है।
मॉर्गन स्टेनली ने एक रिपोर्ट में कहा कि उसे उम्मीद है कि आरबीआई अक्तूबर में मौद्रिक नीति समिति की बैठक के दौरान नीतिगत दर बढ़ा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में उभरते बाजार (इमरजिंग मार्केट) में स्थिरता के बावजूद डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट की उम्मीद है, जिसका कारण एक स्थानीय वित्तीय कंपनी के हाल में डिफॉल्ट होने, तेल की कीमतें तथा राजकोषीय घाटा बढ़ने को लेकर चिंता है।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के डिफॉल्ट करने के कारण कॉरपोरेट स्प्रेड में बढ़ोतरी हुई है और घरेलू वित्तीय संस्थानों पर रिफाइनेंसिंग का दबाव बढ़ा है, वह भी ऐसे समय में जब हमारे अर्थशास्त्री को उम्मीद है कि आरबीआई अक्तूबर की बैठक में नीतिगत दर में बढ़ोतरी करेगा।
सीआरआर घटने की संभावना नहीं
कोटक इकनॉमिक रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विकास दर में अपेक्षित चक्रीय सुधार के अंतर्निहित प्रभाव, रुपये की कमजोरी तथा मध्यम अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के आधार पर एमपीसी अक्तूबर में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है।
बैंकरों को हालांकि यह उम्मीद नहीं है कि तरलता से संबंधित समस्या के बावजूद आरबीआई आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में कमी करेगा।