रिटायरमेंट के बाद हर कोई सुखमय, शांत व स्वस्थ जीवन बिताने की चाहत रखता है। इसके लिए वह अपने रोजगार या नौकरी के दिनों में ही कुछ न कुछ बचत कर रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए एक फंड बनाता है।
आमतौर पर लोग जीवन बीमा कंपनियों की पेंशन योजनाएं, लंबी अवधि के म्यूचुअल फंड, ईपीएफ और पीपीएफ जैसे बचत विकल्प अपनाते हैं। इसी तरह का एक बचत विकल्प न्यू पेंशन प्लान (एनपीएस) भी है।
पेंशन की प्लानिंग नौकरी या रोजगार के शुरुआती दिनों में ही कर लेनी चाहिए। हरेक आदमी को पेंशन का विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 मई 2009 को भारत सरकार ने न्यू पेंशन प्लान (एनपीएस) पेश किया।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से एनपीएस 2004 में ही लांच किया गया था, लेकिन उस वक्त यह केवल केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए ही उपलब्ध थी।
एनपीएस एक दीर्घावधि की बचत योजना है, जिसका उद्देश्य लोगों की रिटायरमेंट की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
दूसरे शब्दों में कहें, तो एनपीएस उन लोगों को पेंशन फंड बनाने में मददगार है, जो नियमित पेंशन बचत योजनाओं में शामिल नहीं हैं।
एनपीएस आपको अपने कार्यकाल के दौरान निवेश करने और सेवानिवृत्ति (60 वर्ष की उम्र) के समय निवेश निकालने की सुविधा देती है।
एनपीएस आपको आपके कुल निवेश का 60 फीसदी 60 वर्ष की आयु से पहले निकालने की अनुमति देता है जबकि बाकी बचा 40 फीसदी आपको मासिक एन्युटी के तौर पर मिलेगा।
‘स्वावलंबन’ की हुई शुरुआत
एनपीएस को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है और समय-समय पर इस स्कीम में काफी फेरबदल भी किए गए हैं।
इस स्कीम को और आकर्षक बनाने के लिए आम बजट 2010-11 में तत्कालीन वित्तमंत्री ने ‘स्वावलंबन स्कीम’ की शुरुआत भी की।
इसके तहत, वित्तीय वर्ष 2010-11 में खोले जा रहे असंगठित क्षेत्र के न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) खातों में सरकार की तरफ से 3 वर्षों तक 1,000 रुपये का अंशदान भी करने का ऐलान किया गया।